बरेली।दरगाह आला हज़रत में 16 अगस्त से शुरू हो रहे उर्स-ए-रज़वी को लेकर शहर पूरी तरह तैयार है। हर साल की तरह इस बार भी बरेली देश-विदेश से आने वाले ज़ायरीन का मेज़बान बनेगा और सभी मेहमानों का खुले दिल से स्वागत करेगा।
उर्स की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। दरगाह और इस्लामिया गेट को रोशनी से सजाया गया है, वहीं इस्लामिया मैदान में आला हज़रत और अहले सुन्नत के बुजुर्गों की किताबों की बिक्री के लिए 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं।
दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) ने टीटीएस रजाकारों की समीक्षा बैठक कर सभी इंतज़ामों का जायज़ा लिया। तैयारियां सय्यद आसिफ मियां की देखरेख में चल रही हैं। जायरीन की खिदमत के लिए करीब 1500 रजाकार तैनात किए गए हैं, जो लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
दरगाह से जुड़े नासिर कुरैशी ने बताया कि शहर का हर कोना मेहमानों की खिदमत के लिए तैयार है। ज़ायरीन की ठहरने की व्यवस्था मदरसों, स्कूलों, शादी हाल और मेहमानखानों में की गई है। पार्किंग के लिए प्रशासन ने कई स्कूलों को अधिकृत किया है। इस्लामिया मैदान में लगने वाला पुस्तक मेला देश के बड़े मज़हबी मेलों में गिना जाता है, जहां कंजुल ईमान, फतावा रजविया, फतावा मुस्तफिया और आला हज़रत का नातिया दीवान सहित कई धार्मिक किताबें उपलब्ध रहेंगी।
सज्जादानशीन बदरुश्शरिया मुफ्ती अहसन मियां की अपील पर आज शहर में पौधारोपण अभियान भी चलाया गया। इस्लामिया मैदान, पीलीभीत बाईपास, बाकरगंज, रज़ा कॉलोनी और फरीदपुर सहित कई इलाकों में फलदार व छायादार पौधे लगाए गए। वहीं रहपुरा चौधरी से फूलों की टोकरी का जुलूस बिना डीजे, हाथों में तिरंगा लेकर दरगाह पहुंचा, जिसमें कार्यकर्ताओं ने रास्ते में पौधे बांटकर “हरियाली का पैगाम” दिया।
उर्स की तैयारियों में टीटीएस के 1500 से अधिक रजाकार लगे हुए हैं। परवेज़ खान नूरी, हाजी जावेद खान, शाहिद नूरी, अजमल नूरी, औरंगज़ेब नूरी, ताहिर अल्वी और दरगाह से जुड़े अन्य जिम्मेदार लगातार व्यवस्था को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। फूलों की टोकरी के जुलूस भी दरगाह पहुंचने शुरू हो गए हैं।




