निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के बयानों से उठा सियासी तूफान, पहले से लिखी जा चुकी थी विवाद की पटकथा?

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भीम मनोहर

बरेली में निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के बयानों ने जिले की सियासत में बड़ा तूफान ला दिया है। कभी यूजीसी से जुड़ा मुद्दा उछालना, तो कभी अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान का मामला उठाना , अब अलंकार अग्निहोत्री की पहचान बनती जा रही है।

पिछले दो दिनों से बरेली में अलंकार अग्निहोत्री लगातार सुर्खियों में हैं। उनके बयान किसी प्रशासनिक अधिकारी से अधिक एक राजनीतिक चेहरे की तरह सामने आ रहे हैं। कभी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, तो कभी ब्राह्मण समाज के अपमान का मुद्दा उठाकर वह सीधे सरकार को घेरते नजर आ रहे हैं।

कहा यह भी जा रहा  लखनऊ से बरेली ज्वाइन करने के बाद से ही अलंकार अग्निहोत्री विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संपर्कों में सक्रिय थे। इसी दौरान भीम आर्मी से जुड़ा एक विवाद भी सामने आया था , जिसने सिटी मजिस्ट्रेट को चर्चा में ला दिया था।

फोटो में निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री

हालांकि विवाद की शुरुआत सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में लगी तस्वीरों को लेकर हुई थी । कार्यालय में डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर न होने पर भीम आर्मी ने आपत्ति जताई थी। इस पर अलंकार अग्निहोत्री ने बयान दिया था कि यह उनका निजी दफ्तर है और वह अपनी इच्छा से किसी की तस्वीर लगाएंगे या नहीं लगाएंगे। हाल में यह भी सामने आया कि यूजीसी और अविमुक्तेश्वरानंद के उनके विरोध के बीच उनकी बातचीत विपक्ष के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय से भी हुई थी।


जब यह पूरा विवाद तूल पकड़ रहा है, उसी दौरान अलंकार अग्निहोत्री के साथ विद्यार्थी परिषद से जुड़े लोगों की मौजूदगी भी लगातार देखी जा रही है। इसमें भाजपा के पूर्व विस्तारक , विद्यार्थी परिषद के संयोजक का नाम भी हैं। इन नामों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि यह विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि पहले से तैयार हो रही थी।

 

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि अलंकार अग्निहोत्री का मामला आगे किस दिशा में जाएगा, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि आने वाले समय में वह किसी न किसी राजनीतिक दल में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं। बरेली में यह प्रकरण अब केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीति और सत्ता के नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।

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Author: newsvoxindia

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