निलंबन और इस्तीफे के बाद बोले परिवारजन: अलंकार अग्निहोत्री बचपन से रहे होनहार, संघर्षों के बीच बनाई PCS तक की राह

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बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद उनके परिवार का पक्ष सामने आया है। कानपुर स्थित उनके आवास पर उनके भाई राजेश कुमार अग्निहोत्री ने अलंकार के जीवन, शिक्षा और संघर्ष को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अलंकार बचपन से ही पढ़ाई में बेहद होनहार रहे हैं और दस भाइयों में सबसे प्रतिभाशाली छात्र थे। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में उन्होंने अच्छे अंक हासिल किए, जो उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है।

राजेश कुमार अग्निहोत्री ने बताया कि अलंकार की मां गीता देवी ने कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए उन्हें पढ़ाया-लिखाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मां के इसी संघर्ष और समर्थन की बदौलत अलंकार ने बीटेक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने करीब दो वर्षों तक आईटी सेक्टर में काम किया और इसके बाद प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर पीसीएस अधिकारी बने।
भाई राजेश का कहना है कि अलंकार का सफर एक साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने की मिसाल है।

 

इस दौरान उन्होंने सवर्ण समाज से जुड़े एक नियम को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि यह नियम सवर्णों के लिए गलत है और इसका विरोध होना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस कानून पर पुनर्विचार करते हुए इसे वापस लेने की मांग की।
इस्तीफे के बाद सामने आया यह पारिवारिक पक्ष अलंकार अग्निहोत्री के संघर्ष, शिक्षा और व्यक्तित्व को उजागर करता है, जबकि पूरे मामले को लेकर चर्चाएं अभी जारी हैं।

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Author: newsvoxindia

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