बरेली। थिएटर अड्डा में रंगालय एकेडेमी ऑफ आर्ट एंड कल्चर द्वारा आयोजित तृतीय 15 दिवसीय थिएटर फेस्टिवल का दसवां दिन रंगारंग प्रस्तुतियों के नाम रहा। खुशलोक सभागार में युथ थिएटर शाहजहांपुर की टीम ने नाटक ‘आखरी रंग’ का मंचन कर दर्शकों को जीवन के संघर्ष और भावनाओं से रूबरू कराया।
नाटक की कहानी एक कलाकार के जीवन पर आधारित रही, जिसमें उसकी खुशियाँ, त्याग और संघर्षों को बेहद संवेदनशीलता से दर्शाया गया। लेखक युग मेहता और निर्देशक शादान खान ने यह दिखाने का प्रयास किया कि कलाकार मंच पर जहां रंग और भावनाओं की आभा बिखेरता है, वहीं निजी जीवन में अक्सर अकेलेपन और कठिनाइयों से जूझता है।
संवादों और दृश्यों के माध्यम से दर्शकों ने महसूस किया कि तालियों की गड़गड़ाहट और वाहवाही के पीछे एक कलाकार कितनी गहरी पीड़ा और बलिदान छुपाता है। नाटक ने यह संदेश भी दिया कि कला का वास्तविक उद्देश्य समाज को आईना दिखाना और दर्शकों तक सच्चाई पहुँचाना है, चाहे इसके लिए कलाकार को अपनी व्यक्तिगत खुशियाँ क्यों न कुर्बान करनी पड़ें।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसमें पार्षद राजेश अग्रवाल, धर्मेंद्र गुप्ता और डॉ. विनोद पागरानी ने सम्मिलित होकर फेस्टिवल का शुभारंभ किया।
फेस्टिवल के आयोजक शैलेन्द्र आजाद ने बताया कि लगातार दस दिनों से चल रहे इस आयोजन में विभिन्न टीमों की प्रस्तुतियों ने बरेली के सांस्कृतिक वातावरण को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने कहा कि आगामी पाँच दिनों में और भी प्रभावशाली प्रस्तुतियां होंगी।
शनिवार को फेस्टिवल के ग्यारहवें दिन युगांधर थिएटर बरेली की टीम ‘दूसरा आदमी दूसरी औरत’ का मंचन करेगी।
