बरेली। आला हज़रत फ़ाज़िले बरेलवी के 107वें उर्स-ए-रज़वी का शुभारंभ सोमवार को रज़वी परचम कुशाई की रस्म के साथ हुआ। दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) की सदारत और सय्यद आसिफ मियां की देखरेख में उर्स की सभी रस्में दरगाह परिसर और इस्लामिया मैदान में अदा की जा रही हैं।
सोमवार को इस्लामिया मैदान के मुख्य द्वार पर रज़वी परचम फहराया गया। जैसे ही परचम लहराया, तकबीर और मसलक-ए-आला हज़रत के नारों से फिज़ा गूंज उठी। परचम कुशाई के बाद दरगाह प्रमुख ने विशेष दुआ कराई। इससे पहले अजम नगर से परंपरागत परचमी जुलूस विभिन्न मार्गों से होता हुआ दरगाह पहुँचा। सलामी के बाद जुलूस पुनः इस्लामिया मैदान पहुँचा।
शाम को दरगाह परिसर में हुज्जातुल इस्लाम मुफ्ती हामिद रज़ा खान (हामिद मियां) के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने अपने खिताब में कहा कि हुज्जातुल इस्लाम ने 1938 में मुरादाबाद की ऐतिहासिक कॉन्फ्रेंस में मुसलमानों से शिक्षा और आर्थिक मजबूती पर ज़ोर दिया था। उन्होंने कहा कि आला हज़रत की वजह से बरेली दुनियाभर में सुन्नियत का केंद्र बना।
इसके बाद नातिया मुशायरा का आयोजन हुआ, जिसकी सदारत हज़रत अहसन मियां ने की। मिसरा-ए-तरही “पीते हैं तिरे दर का, खाते हैं तिरे दर का” और दूसरा मिसरा “हम तो खुद्दार हैं, खुद्दारी है शेवाह अपना” पर शायरों ने अपने कलाम पेश किए। मुशायरे का संचालन कारी नाज़िर रज़ा ने किया। मुफ़्ती आकिल रज़वी, मुफ़्ती जमील, मौलाना डॉक्टर एज़ाज़ अंजुम, मौलाना अख्तर समेत कई विद्वानों की मौजूदगी में देर रात तक यह कार्यक्रम चलता रहा।
दिनभर जिलेभर से चादरपोशी के जुलूस दरगाह पहुंचे। रहपुरा, ठिरिया निजावत खां, स्वाले नगर, आजम नगर, किला और आंवला समेत कई इलाकों से बड़ी संख्या में जायरीन शामिल हुए।
आगामी कार्यक्रम
19 अगस्त को सुबह फ़ज्र की नमाज़ के बाद कुरानख्वानी होगी। 9:58 पर रेहाने मिल्लत और 10:30 बजे मुफस्सिर-ए-आज़म के कुल शरीफ की रस्म अदा होगी। इसके बाद आपसी सौहार्द कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी, जिसमें उलेमा नामूसे रिसालत, मिशन मसलक-ए-आला हज़रत, समाज सुधार और हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे। देर रात 1:40 पर मुफ्ती आज़म-ए-हिन्द के कुल शरीफ की रस्म होगी।
विदेशी मेहमान
उर्स में भाग लेने के लिए मॉरिशस से मुफ्ती नदीम मंजरी, मुफ्ती रियाजुल हसन, मुफ्ती इमरान, नेपाल से मौलाना फूल मोहम्मद नेमत, साउथ अफ्रीका से मौलाना सलीम खुशतरी, दुबई से हबीब उर रहमान, कतर से मौलाना शफीक और ओमान से मौलाना सलमान बरेली पहुँच चुके हैं।
इस तरह रज़वी परचम लहराते ही उर्स-ए-रज़वी का आगाज़ हो गया और बरेली में अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा।
