बरेली। आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां फाज़िले बरेलवी के 108वें उर्स-ए-रज़वी का गुरुवार को परचम कुशाई की रस्म के साथ विधिवत शुभारंभ हो गया। दरगाह परिसर और इस्लामिया मैदान में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में देश-विदेश से पहुंचे जायरीन और उलेमा शामिल हुए। नातिया मुशायरा, महफिल-ए-मिलाद और कुल शरीफ की रस्मों का सिलसिला चलता रहा।

दरगाह प्रबंधन के अनुसार, सभी रस्में दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) की अध्यक्षता और सैयद आसिफ मियां की देखरेख में संपन्न कराई जा रही हैं।

गुरुवार शाम को इस्लामिया मैदान स्थित रज़ा गेट पर रज़वी परचम स्थापित किया गया। निर्धारित समय पर दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां ने उलेमा और हजारों जायरीन की मौजूदगी में परचम कुशाई की रस्म अदा की। परचम लहराते ही नारों की गूंज के बीच उर्स का औपचारिक आगाज़ हुआ।
फातिहा और विशेष दुआ के बाद पूरा परिसर आला हज़रत की लिखी नात और मनकबत से गूंज उठा।इससे पहले आज़म नगर से मुख्य परचमी जुलूस पारंपरिक मार्गों से होता हुआ दरगाह पहुंचा। ठिरिया निजावत खान और रहपुरा चौधरी सहित अन्य स्थानों से भी चादर और परचम के जुलूस दरगाह पहुंचे। रास्ते भर विभिन्न स्थानों पर लोगों ने फूल बरसाकर जुलूस का स्वागत किया। कई स्थानों पर लंगर और फातिहाख्वानी का भी आयोजन किया गया, जहां सभी समुदायों के लोगों की भागीदारी देखने को मिली।
मग़रिब की नमाज़ के बाद महफिल-ए-मिलाद आयोजित हुई, जबकि हुज्जतुल इस्लाम मुफ़्ती हामिद रज़ा खान के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इस अवसर पर उलेमा ने उनके धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता का संदेश देकर समाज को नई दिशा दी तथा सुन्नी विचारधारा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शुक्रवार को यह होंगे कार्यक्रम
उर्स के दूसरे दिन यानी 7 अगस्त (जुमा) को फज्र की नमाज़ के बाद कुरआनख्वानी होगी। इसके बाद रेहाने मिल्लत और मुफस्सिर-ए-आज़म के कुल शरीफ की रस्में अदा की जाएंगी। दिन में आयोजित मज़हब-ओ-मसालिक कॉन्फ्रेंस में नामूसे रिसालत, मिशन मसलक-ए-आला हज़रत, समाज सुधार, आपसी सौहार्द और सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन जैसे विषयों पर देशभर से आए उलेमा अपने विचार रखेंगे। देर रात मुफ़्ती-ए-आज़म-ए-हिंद के कुल शरीफ की रस्म के साथ दिनभर के कार्यक्रमों का समापन होगा।
उर्स प्रबंधन का कहना है कि जायरीनों की सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और कमेटी के सदस्य लगातार सेवाएं दे रहे हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।



