बरेली में किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा सत्याग्रह आंदोलन सोमवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गया। डॉ. हरीश गंगवार के नेतृत्व में किसान पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है, जिससे उनमें असंतोष बढ़ता जा रहा है।

सोमवार को आंदोलनकारी किसान अपनी मांगों को लेकर एडिशनल कमिश्नर श्रीमती प्रीति जायसवाल को ज्ञापन सौंपने के लिए जा रहे थे। किसानों का दावा है कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाना चाहते थे, लेकिन इसी दौरान पुलिस प्रशासन ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया। इससे कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया, हालांकि किसानों ने संयम बनाए रखा।
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष दिनेश दद्दा ने पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और ज्ञापन देने का अधिकार है। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने जा रहे किसानों को रोका जाना उचित नहीं है।
कांग्रेस प्रवक्ता पंडित राज शर्मा ने प्रशासन से अपील की कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना जाए, ताकि बातचीत के जरिए आंदोलन का समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि संवाद ही किसी भी समस्या का स्थायी हल होता है।
किसान नेता तरुण पटेल ने बताया कि वे गोण्डा से किसानों के समर्थन में बरेली पहुंचे हैं और जब तक किसानों को न्याय नहीं मिलता, वे आंदोलन में डटे रहेंगे। वहीं किसान जिलाध्यक्ष विपिन पटेल ने कहा कि भारतीय किसान संगठन किसानों के इस सत्याग्रह को पूरा समर्थन दे रहा है और उनकी मांगों के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।



