बरेली। 107वें उर्स-ए-रज़वी के अवसर पर दरगाह आला हज़रत के प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) ने दुनिया भर से आने वाले जायरीन के नाम खास पैग़ाम जारी किया।
उन्होंने कहा कि दुनिया में अच्छी और बुरी दोनों तरह की शख्सियतें मौजूद हैं, लेकिन कुछ हस्तियां ऐसी होती हैं जिनके ज्ञान, कार्य और योगदान उन्हें अमर बना देते हैं। आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा फाज़िले बरेलवी ने ऐसा ही इतिहास रचा। उनका इल्म इतना गहरा और व्यापक था कि हर कोई हैरत में पड़ गया। उनका पूरा जीवन कुरान और सुन्नत पर अमल करते हुए, इश्क-ए-रसूल के जज़्बे के साथ गुज़रा।
उन्होंने कहा कि “हमारे दादा जान आला हज़रत ने अपने इल्मी और दीनी सलाहियतों से मुसलमानों में जो ज़हनी इंक़लाब पैदा किया, उसकी गवाही आज पूरी सदी दे रही है।”देश-विदेश से आने वाले मुरीदीन को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि इस मुबारक उर्स-ए-रज़वी का पैग़ाम यही है कि मुसलमान दीन-ए-इस्लाम पर मजबूती से कायम रहें और अल्लाह की रस्सी को थामे रखें। खानकाही इत्तेहाद (एकता) पर जोर देते हुए कहा गया कि बुज़ुर्गों ने हमेशा आपसी मोहब्बत और भाईचारे का सबक दिया है।
दरगाह प्रमुख और सज्जादानशीन ने आगे कहा कि मुसलमान मसलक-ए-अहले सुन्नत के साथ-साथ मुल्क की तरक्की और खुशहाली के लिए भी काम करें। इस्लाम और आला हज़रत का पैग़ाम मोहब्बत है और इसे समाज में आम करना ही सच्ची ख़िदमत है।
उन्होंने युवाओं को खासतौर पर नसीहत की कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल बेहद एहतियात से करें, सामाजिक बुराइयों से दूर रहें और अपने मज़हब व मुल्क के सच्चे वफादार बनें। लोगों की भलाई और इंसानियत की सेवा ही आला हज़रत को सच्चा ख़िराज-ए-अक़ीदत होगा।




