बरेली। देश में पशुधन की नस्ल सुधार और डेयरी उत्पादन को नई तकनीक से गति देने की तैयारी है। बरेली में आयोजित कैटल जीनोमिक्स समिट-2026 के दौरान बीएल एग्रो ने अपनी बायोटेक्नोलॉजी कंपनी लीड्स जेनेटिक्स में 1,500 करोड़ रुपये निवेश

14 और 15 सितंबर को बीएल कामधेनु फार्म्स में आयोजित समिट में कंपनी ने बताया कि प्रस्तावित मॉडल को उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश में भी विस्तार देने की योजना है। इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों के साथ बातचीत की जा रही है।
कंपनी के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में इंटीग्रेटेड डेयरी और जेनेटिक्स इकोसिस्टम तैयार किए जाएंगे। इनमें ब्रीड इम्प्रूवमेंट फार्म, आईवीएफ-ईटी सेंटर, एमओईटी सुविधा, पैथोलॉजी लैब और जीनोमिक्स लैब जैसी सुविधाएं विकसित होंगी। इसका मकसद पशुओं की बेहतर नस्ल की पहचान से लेकर प्रजनन, स्वास्थ्य और दूध उत्पादन तक की प्रक्रिया को एकीकृत करना है।
राजेंद्र शुक्ला ने बताया महत्वपूर्ण कदम
समिट में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि आधुनिक पशु आनुवंशिकी, ब्रीडिंग तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान पर काम देश के डेयरी और पशुधन क्षेत्र को मजबूत कर सकता है। उन्होंने बीएल एग्रो और लीड्स जेनेटिक्स के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर करने की संभावनाएं हैं।

उत्तर प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि भारत दूध उत्पादन में अग्रणी है, लेकिन प्रति पशु उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने स्वदेशी नस्लों को मजबूत करने और देश में एलीट बुल्स, भ्रूण तथा सेक्स्ड सीमेन तैयार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
समिट में जीनोमिक्स, आईवीएफ, एडवांस्ड सीक्वेंसिंग और डेटा आधारित ब्रीडिंग तकनीकों का प्रदर्शन भी किया गया। कंपनी ने वर्ष 2027 के अंत तक हर महीने 15 हजार भ्रूण उत्पादन की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। बीएल एग्रो का कहना है कि बेहतर जेनेटिक्स के जरिए भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल अधिक उत्पादक पशुधन तैयार करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।




