बरेली। सरकारी योजना के तहत आसान लोन दिलाने का भरोसा देकर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का भोजीपुरा पुलिस ने खुलासा किया है। गिरोह का तरीका इतना शातिर था कि पहले लोगों के आधार में हेरफेर करके बैंक खाते और मोबाइल सिम तैयार कराए जाते, फिर खातों में वेतन के नाम पर रकम डालकर उन्हें सरकारी कर्मचारी के तौर पर पेश किया जाता था। इसके बाद बैंक से लाखों रुपये का लोन स्वीकृत कराकर अधिकांश रकम आरोपी खुद निकाल लेते थे। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राम नयन गुप्ता उर्फ कृष्ण कन्हैया, राकेश गुप्ता, अनिल गुप्ता और ऋषभ कुमार सक्सेना के रूप में हुई है। टीम ने मॉडर्न विलेज स्थित एक मकान पर देर रात करीब 1:27 बजे छापा मारकर इन्हें पकड़ा। कार्रवाई भोजीपुरा पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम ने संयुक्त रूप से की।
जांच में सामने आया कि गिरोह लोगों के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर नए मोबाइल सिम निकलवाता था। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के सहारे विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। खातों में दो से तीन महीने तक वेतन के नाम पर रकम ट्रांसफर की जाती थी। फर्जी परिचय पत्र, फॉर्म-16 और वेतन पर्चियों के जरिए खाताधारक को सरकारी कर्मचारी दिखाया जाता था, ताकि बैंक से आसानी से लोन स्वीकृत कराया जा सके।
पुलिस के मुताबिक बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक समेत अन्य बैंकों से 15 से 20 लाख रुपये तक के लोन कराए जाते थे। लोगों को बताया जाता था कि उन्हें प्रधानमंत्री योजना के तहत लोन मिला है। लोन की रकम खाते में पहुंचने के बाद आरोपी चेक और एटीएम के जरिए पैसा निकाल लेते थे। लाभार्थी को मामूली रकम देकर शेष राशि आपस में बांट ली जाती थी।
एक मामले में लखीमपुर खीरी निवासी व्यक्ति के नाम पर 20 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराया गया, लेकिन उसे केवल 71 हजार रुपये दिए गए। बाकी रकम आरोपियों ने अपने पास रख ली।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3.50 लाख रुपये नकद, 75 एटीएम कार्ड, 28 चेकबुक, सात बैंक पासबुक, 12 मोबाइल फोन और 11 सिम कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा कैनरा बैंक की मुहर, फर्जी वेतन पर्चियां, पहचान पत्र, आधार-पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज भी मिले हैं।
एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्र ने बताया कि एसएसपी के निर्देश पर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान यह कार्रवाई की गई। पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश के साथ गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, फर्जी खातों और बैंक लेनदेन की जांच कर रही है। इससे गिरोह द्वारा अब तक किए गए फर्जीवाड़े की पूरी रकम और नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।



