बरेली। उत्तर प्रदेश में गौवंश संरक्षण को अब ग्रामीण रोजगार और प्राकृतिक खेती से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष रमाकांत उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश की गौशालाओं का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को बेहतर किया जा रहा है। आयोग का फोकस गोवंश के स्वास्थ्य के साथ ग्रामीण युवाओं को गोपालन से जोड़ने पर भी है।
उपाध्याय के मुताबिक गौशालाओं में हरा चारा, चोकर, स्वच्छ पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। कमजोर और बीमार गोवंश के लिए अलग व्यवस्था, छोटे बछड़ों के लिए विशेष स्थान, आइसोलेशन वार्ड और घायल पशुओं को उठाने के लिए लिफ्टर जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है। गौशालाओं के संचालन में समाजसेवियों, संतों और संस्थाओं को जोड़ने की भी योजना है।
युवाओं को गोपालन से जोड़ने की तैयारी
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की जनसहभागिता योजना के तहत ग्रामीण युवाओं को गोपालन और प्राकृतिक खेती से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। दो गाय खरीदने पर प्रति गाय 40 हजार रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है। इससे युवा गांव में रहकर पशुपालन को रोजगार का जरिया बना सकते हैं।
गोबर से बायोगैस और जैविक खाद
रमाकांत उपाध्याय ने कहा कि गोबर से बायोगैस, जीवामृत और जैविक खाद तैयार करने को बढ़ावा दिया जाएगा। एक लाख बायोगैस संयंत्रों की योजना पर काम किया जा रहा है। तकनीकी अध्ययन के बाद किसानों को सब्सिडी के आधार पर संयंत्र उपलब्ध कराने की योजना है।
देशी गाय की नस्ल सुधार पर जोर
उन्होंने बताया कि देशी गायों की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दिया जा रहा है। बेहतर सीमन के इस्तेमाल से अगली पीढ़ी में दूध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य है। आयोग का उद्देश्य गोवंश संरक्षण के साथ किसानों और ग्रामीण युवाओं की आय बढ़ाना भी है।



