बरेली। वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में कथित तौर पर केक काटने के आरोपों को लेकर उठे विवाद पर बरेली के मेयर उमेश गौतम ने पहली बार खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों को भ्रामक बताते हुए कहा कि मंदिर में किसी भी तरह का केक न तो ले जाया गया और न ही काटा गया। उनके अनुसार, वीडियो में दिखाई देने वाली वस्तु मावे से तैयार किया गया प्रसाद था, जिसे पहले भगवान बांके बिहारी को अर्पित किया गया और उसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।

मेयर उमेश गौतम ने कहा कि वह ब्रज क्षेत्र के गोसाईं समाज से जुड़े हैं और बांके बिहारी मंदिर की धार्मिक परंपराओं तथा व्यवस्थाओं से पूरी तरह परिचित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर के नियमों के अनुसार केक ले जाना या काटना संभव ही नहीं है, इसलिए लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने वीडियो को गलत तरीके से प्रस्तुत कर अनावश्यक विवाद पैदा करने का प्रयास किया है। उनका आरोप है कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके और इस मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा सके।
उल्लेखनीय है कि 30 जून को मेयर उमेश गौतम अपने बेटे पार्थ गौतम एवं परिवार के कुछ अन्य लोगों के साथ हेलीकॉप्टर से वृंदावन पहुंचे थे। वहां उन्होंने बांके बिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें मंदिर परिसर में उनके द्वारा केक काटे जाने का दावा किया गया। वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने मंदिर की परंपराओं और वीआईपी संस्कृति का हवाला देते हुए इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया।
मेयर की ओर से अब सामने आई सफाई के बाद इस पूरे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि सोशल मीडिया पर इसे लेकर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है, लेकिन मेयर का कहना है कि वायरल किए गए दावों का वास्तविक घटनाक्रम से कोई संबंध नहीं है और लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की गई है।




