बरेली। फरीदपुर तहसील क्षेत्र में कथित स्मैक तस्कर की आलीशान कोठी की जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में जिस भवन को पूरी तरह निजी जमीन पर बना बताया गया था, दोबारा हुई पड़ताल में सरकारी भूमि पर कब्जे की पुष्टि हो गई। मामले में एक लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है, जबकि कानूनगो के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति जिलाधिकारी को भेजी गई है।
मोहनपुर गांव निवासी मेहताब और उसका भाई शब्बू लंबे समय से नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों में चर्चा में रहे हैं। हाल ही में मेहताब की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने उसकी संपत्तियों की जांच शुरू की। गांव में बनी उसकी आलीशान कोठी की जांच के लिए राजस्व विभाग की टीम लगाई गई थी।
प्रारंभिक रिपोर्ट में संबंधित लेखपाल और कानूनगो ने अधिकारियों को बताया कि कोठी निजी भूमि पर बनी है तथा सरकारी जमीन पर कोई अतिक्रमण नहीं है। हालांकि रिपोर्ट पर संदेह होने के बाद एसडीएम रामजनम यादव ने नायब तहसीलदार की निगरानी में दोबारा जांच कराई।
नई जांच रिपोर्ट में सामने आया कि कोठी निर्माण के दौरान करीब 300 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर कब्जा किया गया है। साथ ही कब्रिस्तान, श्मशान और अन्य सार्वजनिक भूमि पर भी अतिक्रमण के तथ्य सामने आए हैं।
एसडीएम रामजनम यादव ने बताया कि पहली जांच में सरकारी जमीन को खाली दर्शाया गया था, जबकि पुनः जांच में भूमि पर कब्जे की पुष्टि हुई है। गलत रिपोर्ट देने के कारण लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है और कानूनगो के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी गई है।
उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन को जल्द खाली कराया जाएगा। साथ ही आरोपी और उसके परिजनों की अन्य संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। अवैध रूप से अर्जित संपत्तियां मिलने पर उन्हें फ्रीज या जब्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।




