बरेली। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (उपज) बरेली इकाई की ओर से “एआई और पत्रकारिता : अवसर एवं चुनौती” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ और युवा पत्रकारों ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभाव तथा पत्रकारिता के मूल्यों पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला सूचना अधिकारी नीतू कनौजिया थीं, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार दादा शंकर दास ने की। उपज के जिला अध्यक्ष डॉ. आशीष गुप्ता ने कहा कि एआई एक उपयोगी तकनीकी उपकरण है, लेकिन यह कभी भी पत्रकार की संवेदनशीलता, अनुभव और सामाजिक सरोकारों का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने पत्रकारों से तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने का आह्वान किया।

वरिष्ठ पत्रकार संजीव गंभीर ने कहा कि समय के साथ तकनीक को अपनाना जरूरी है, लेकिन पत्रकारिता की विश्वसनीयता और मूल्यों से समझौता नहीं होना चाहिए। जिला महामंत्री अजय कश्यप ने कहा कि समाज आज भी सत्य और तथ्यपरक जानकारी के लिए पत्रकारों पर भरोसा करता है।
वरिष्ठ पत्रकार भीम मनोहर ने कहा कि एआई को अपना “सर्वेंट” बनाकर इस्तेमाल करें, उसे “मास्टर” न बनने दें। एआई से तैयार सामग्री को प्रकाशित करने से पहले एक बार जरूर जांचें। उन्होंने कहा कि एआई अभी शुरुआती दौर में है और भविष्य में सुपर कैटेगरी में पहुंचने पर इसकी उपयोगिता और लोकप्रियता और बढ़ेगी।
डॉ. स्वतंत्र कुमार ने कहा कि तकनीक लगातार विकसित होती है, लेकिन मानव सभ्यता और मानवीय सोच का स्थान नहीं ले सकती। कार्यक्रम में आर.बी. लाल, संजीव गंभीर और दादा शंकर दास को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत हो जाए, पत्रकारिता की आत्मा हमेशा सत्य, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व में ही निहित रहेगी।




