बरेली। वैवाहिक कानून को सरल और व्यावहारिक रूप में समझाने वाली वरिष्ठ अधिवक्ता रजत बिंदल की पुस्तक “हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 टीका एवं व्याख्या का बार एसोसिएशन सभागार में विमोचन किया गया। पुस्तक का लोकार्पण आलोक माथुर (इलाहाबाद उच्च न्यायालय) ने किया। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी और बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।

लगभग एक वर्ष की मेहनत से तैयार इस पुस्तक में Hindu Marriage Act की धारा-दर-धारा सरल और विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की गई है। इसमें शून्य एवं शून्यकरणीय विवाह, तलाक के विभिन्न आधार, न्यायिक पृथक्करण, वैवाहिक अधिकारों की बहाली, भरण-पोषण (धारा 24 व 25), मानसिक व शारीरिक क्रूरता, बच्चों की अभिरक्षा तथा पारिवारिक न्यायालय में वाद दायर करने की प्रक्रिया को आसान भाषा में समझाया गया है।

पुस्तक में तलाक की प्रक्रिया, संभावित समयावधि और वाद-पत्र के प्रारूप तक की उपयोगी जानकारी भी दी गई है।लेखक रजत बिंदल ने कानून को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण संशोधन सुझाव भी दिए हैं।
इनमें मामलों के निस्तारण की स्पष्ट समय-सीमा तय करना, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और बयानों की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करना, पहली सुनवाई पर समन तामील सुनिश्चित करना, संयुक्त अभिरक्षा को बढ़ावा देना, धारा 14 में संशोधन, पत्नी को संपत्ति में स्पष्ट हिस्सेदारी का प्रावधान, प्रतीक्षा अवधि 6 माह से घटाकर 3 माह करना, भरण-पोषण के लिए स्पष्ट मानक तय करना तथा “विवाह के अपूरणीय विखंडन” को तलाक का स्वतंत्र आधार बनाने का सुझाव शामिल है।
अपने संबोधन में न्यायमूर्ति आलोक माथुर ने पुस्तक को विधि-जगत के लिए उपयोगी और मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि यह अधिवक्ताओं और विधि-छात्रों दोनों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ साबित होगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि का परिचय अधिवक्ता गार्गी बिंदल ने कराया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया गया। लेखक ने बताया कि पुस्तक जल्द ही प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध होगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।



