बरेली।जनपद बरेली में चिटफंड ठगी के मामलों में आरोपी कन्हैया गुलाटी पर दर्ज मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक अलग-अलग थानों में उसके खिलाफ करीब 60 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। पुलिस पिछले एक महीने से गुलाटी और उसके गिरोह की तलाश में लगातार दबिश दे रही है, लेकिन अब तक न तो आरोपी का सुराग लग सका है और न ही उसके परिवार के बारे में कोई ठोस जानकारी हाथ लगी है।

जानकारी के अनुसार कन्हैया गुलाटी पर आरोप है कि उसने अपनी चिटफंड कंपनी के जरिए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार समेत कई राज्यों में करीब 1800 करोड़ रुपये की ठगी की है। निवेश की रकम कम समय में दोगुनी करने का लालच देकर उसने सैकड़ों लोगों को अपने जाल में फंसाया।
रिटायर्ड फौजी से लेकर नेताओं तक बने शिकार
पुलिस सूत्रों के मुताबिक कन्हैया गुलाटी की ठगी की सूची काफी लंबी है। इस जालसाज ने एक पूर्व सीईओ, कई होमगार्ड कर्मियों, एक समाजवादी पार्टी नेता और खासतौर पर रिटायर्ड फौजियों को अपना शिकार बनाया। शहर के विभिन्न थानों में उसके खिलाफ लगातार मुकदमे दर्ज हो रहे हैं, लेकिन कार्रवाई अब तक केवल तलाश तक सीमित दिखाई दे रही है।
लुकआउट नोटिस जारी, फिर भी गिरफ्तारी नहीं
कन्हैया गुलाटी के खिलाफ गृह मंत्रालय द्वारा लुकआउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विदेश भागने की आशंका
बताया जा रहा है कि जैसे-जैसे शिकायतें बढ़ीं, वैसे-वैसे कन्हैया गुलाटी ने अपनी संपत्तियां रिश्तेदारों और करीबियों के नाम करना शुरू कर दिया या फिर उन्हें बेच दिया। आशंका जताई जा रही है कि वह नेपाल के रास्ते किसी खाड़ी देश में फरार हो सकता है।
कई थानों में दर्ज हैं केस
कन्हैया गुलाटी के खिलाफ प्रेमनगर, इज्जतनगर, कैंट, सीबीगंज, बारादरी, नवाबगंज समेत जनपद के कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं। इसके बावजूद वह पुलिस की पकड़ से बाहर है, जिससे जनपद में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
एक ओर जहां बरेली पुलिस अपराध नियंत्रण और निस्तारण के मामलों में प्रदेश स्तर पर बेहतर प्रदर्शन का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कन्हैया गुलाटी प्रकरण में लगातार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई न होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।



