बरेली। केंद्रीय आम बजट 2026 को लेकर जहां विभिन्न वर्गों को राहत की उम्मीद थी, वहीं आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मियों के हाथ एक बार फिर निराशा लगी है। शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष हरी शंकर ने बजट को इन कर्मचारियों की उपेक्षा करने वाला बताया है।
जिलाध्यक्ष हरी शंकर ने कहा कि आम बजट देश के करोड़ों नागरिकों और विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए उम्मीद का केंद्र होता है, जो न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार की स्थिरता के लिए सरकार की ओर आशा भरी निगाहों से देखते हैं। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण सत्य यह है कि केंद्रीय आम बजट 2026 में आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मियों के लिए कोई ठोस और प्रत्यक्ष प्रावधान नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि आज देश के अधिकांश सरकारी विभाग जैसे बैंक, रेलवे, नगर निगम, अस्पताल, विश्वविद्यालय, शिक्षा विभाग, विद्युत विभाग और अन्य सार्वजनिक संस्थान आउटसोर्सिंग व संविदा कर्मियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। सफाई, सुरक्षा, कार्यालय सहायक, तकनीकी कार्य और डेटा संचालन जैसे महत्वपूर्ण कार्य इन्हीं कर्मियों द्वारा किए जाते हैं, इसके बावजूद बजट में इनके हितों की पूरी तरह अनदेखी की गई है।
हरी शंकर ने आरोप लगाया कि बजट में उद्योगों को प्रोत्साहन और बड़े पूंजीपतियों के लिए योजनाएं तो दिखाई दे रही हैं, लेकिन आउटसोर्सिंग व संविदा कर्मियों के वेतन में वृद्धि, न्यूनतम वेतन की गारंटी और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार ने पूर्ण मौन साध रखा है। यह वर्ग पहले से ही कम वेतन, असुरक्षित भविष्य और शोषणकारी व्यवस्था से जूझ रहा है, फिर भी बजट में इनके लिए कोई वित्तीय या नीतिगत प्रावधान नहीं किया गया, जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” और “अमृत काल” जैसे नारों के बीच आउटसोर्सिंग व संविदा कर्मी खुद को उपेक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। यदि ये कर्मचारी एक दिन कार्य बंद कर दें तो सरकारी व्यवस्था ठप हो सकती है, फिर भी बजट में इन्हें कोई प्राथमिकता नहीं दी गई।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मियों को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन यह बजट भी उनके लिए निराशा और उपेक्षा का प्रतीक बनकर रह गया। अब समय आ गया है कि सरकार केवल घोषणाओं से आगे बढ़कर आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मियों के लिए ठोस कदम उठाए।




