बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का मामला दूसरे दिन भी हाईवोल्टेज ड्रामा में तब्दील हो गया। सिटी मजिस्ट्रेट ने खुद को घर में नजरबंद किए जाने का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग तक कर डाली। उन्होंने दावा किया कि प्रशासनिक दबाव के चलते उन्हें उनके ही सरकारी आवास में सीमित कर दिया गया है।

अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि वह अपने ही घर में नजरबंद हैं और उनके साथ अन्याय हो रहा है। इस बयान के सामने आते ही प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया।
गौरतलब है कि इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी कानून और जगद्गुरु अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान से आहत होकर अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उन्होंने इस पूरे मामले को संवैधानिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ा बताते हुए विरोध दर्ज कराया था। इस्तीफे के बाद से ही मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
नजरबंदी के आरोपों के बीच सिटी मजिस्ट्रेट अपने समर्थकों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। हालांकि डीएम की गैरमौजूदगी के कारण उनकी मुलाकात एडीएम सिटी से हुई। इसके बाद भी अलंकार अग्निहोत्री समर्थकों के साथ डीएम कार्यालय परिसर में ही बैठ गए।इस दौरान वहां मौजूद समर्थकों ने मोदी सरकार और योगी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया।

एहतियातन सिटी मजिस्ट्रेट के सरकारी आवास के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं और पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस प्रशासन ने पूरे एडीएम आवासीय क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को चाकचौबंद कर दिया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।फिलहाल सिटी मजिस्ट्रेट प्रकरण को लेकर बरेली ही नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर पर भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

