जंग नहीं, बातचीत से ही संभव है समाधान; भारतीय सेना की बहादुरी को सलाम
बरेली। ऑल इंडिया जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन ने कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका द्वारा मध्यस्थता की संभावनाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह भारत और पाकिस्तान का आंतरिक मामला है, इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका की कोई आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत किसी विदेशी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता। “देश की जनता और हमारी सरकार की यही इच्छा है कि कश्मीर पर कोई बाहरी हस्तक्षेप न हो। यह हमारी संप्रभुता से जुड़ा मामला है,” मौलाना ने कहा।
भारतीय सेना की सराहना
मौलाना शाहबुद्दीन ने आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सेना की कार्यवाही की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “हमारे बहादुर जवानों ने पाकिस्तानी सेना को मुंहतोड़ जवाब दिया है। देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए उनकी भूमिका सराहनीय है। मैं भारतीय सेना के एक-एक सिपाही को सलाम करता हूं।”
अमेरिका और सऊदी की भूमिका पर बयान
हालिया सीजफायर को लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और सऊदी अरब ने जंगबंदी में कुछ हद तक भूमिका निभाई, लेकिन समाधान का एकमात्र रास्ता संवाद है। “जंग किसी मसले का हल नहीं होती, बातचीत ही हर समस्या का स्थायी समाधान है,” उन्होंने कहा।
“खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते”
प्रधानमंत्री मोदी के “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते” वाले बयान का समर्थन करते हुए मौलाना शाहबुद्दीन ने कहा कि भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है और पड़ोसी देशों से अच्छे रिश्ते चाहता है, लेकिन पाकिस्तान लगातार उकसावे की कार्रवाई करता रहा है, जो चिंता का विषय है।
मुख्य बातें:
- कश्मीर भारत का आंतरिक मामला, किसी मध्यस्थता की जरूरत नहीं: मौलाना शाहबुद्दीन
- भारतीय सेना की बहादुरी को सलाम
- आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी
- युद्ध नहीं, संवाद ही समाधान का रास्ता
- पाकिस्तान को उकसावे की कार्रवाई बंद करनी चाहिए




