रिद्धिमा के गायन गुरुओं और विद्यार्थियों की शास्त्रीय रागों पर गीतों पर विशेष प्रस्तुत

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बरेली। श्रीराम मूर्ति स्मारक रिद्धिमा में गुरुवार (10 अप्रैल 2025) को आयोजित सुर लहरी में गायन के विद्यार्थियों और गुरुओं के स्वरों की थिरकन पर श्रोता झूमने पर मजबूर हो गए। कार्यक्रम का आरंभ गायन के विद्यार्थी इंदू परडल, अंशुमा अग्रवाल, सोनम गुआल, अर्नव कनौजिया, सार्थक कठेरिया, स्वरित तिवारी, गौरी गोयल ने किया। इन्होंने भजन ‘श्रीराम चंद्र कृपालु भजमन’, ‘महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम’, ‘काहे बना बतिया सैया छोड़ गये’, गजल ‘कभी किसी को मुकम्मल नहीं मिलता’ और ‘हमरी अटरिया पे’ को अलग अलग अपनी आवाज में प्रस्तुत किया।

 

 

 

विद्यार्थियों के बाद गायन गुरुओं ने मंच संभाला। गायन गुरु शालिनी पांडेय ने ‘रंग डारूंगी नन्द के लालन पे’, गायन गुरु स्नेह आशीष दुबे ने ‘का करू सजनी आये न बालम’ और गायन गुरु प्रियंका ग्वाल ने ‘याद पिया की आये’ को अपने स्वरों में प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति के लिए अतिथि कलाकार रीटा शर्मा मंच पर आईं और उन्होंने संगीतकार रवि के संगीत निर्देशन में फिल्म चौहदवीं का चांद के लिए सर्वश्रेष्ट गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार हासिल करने वाले शकील बदायुंनी के गाने ‘चौदहवीं का चांद हो’ को अपने सुमधुर स्वरों में पेश किया। श्रोता देर तक तालियां बजा कर इस गाने पर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का फिल्मफेयर पुरस्कार हासिल करने वाले मुहम्मद रफी को याद करते रहे।

 

इंस्ट्रूमेंट गुरु उमेश मिश्रा (सारंगी), सूर्यकांत चौधरी (वायलिन), सुमन बिस्वास (ढोलक), अमरनाथ (तबला), सूरज पांडेय (बांसुरी), टुकुमनी सेन (हारमोनियम), अनुग्रह सिंह (ड्रम व कीबोर्ड) और विशेष सिंह (गिटार) ने अपने अपने वाद्ययंत्रों के साथ संगत देकर सुर लहरी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस मौके पर ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति जी, आशा मूर्ति जी, आदित्य मूर्ति जी, ऋचा मूर्ति जी, उषा गुप्ता जी, डा. रजनी अग्रवाल, सुभाष मेहरा, डा. एमएस बुटोला, डा. प्रभाकर गुप्ता, डा.अनुज कुमार, डा.शैलेश सक्सेना सहित शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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Author: newsvoxindia

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