तीन तिथियों के संगम में होगी निर्जला एकादशी,

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बरेली: मनुष्य के मोक्ष की प्रशस्ति का सबसे पावन दिन निर्जला एकादशी इस बार 10 जून और 11 जून दोनों दिन है। क्योंकि ज्योतिष के अनुसार 10 जून शुक्रवार को एकादशी तिथि का मान प्रातः 7:29 से लग जाएगा जो कि अगले दिन 11 जून को प्रातः ब्रह्म मुहूर्त की बेला 5:44 तक रहेगा। धर्म शास्त्रों के अनुसार दशमी युक्त एकादशी उपवास नहीं किया जाता है। एकादशी मिश्रण द्वादशी में एकादशी का उपवास करना उत्तम माना गया है इसलिए 11 जून को निर्जला एकादशी का पर्व मनाना श्रेष्ठ और मंगलकारी रहेगा। 11 जून शनिवार को एकादशी में त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग व्याप्त रहेगा। बता दें, शनिवार में तीन तिथियों का संगम होना दुर्लभ संयोग है। क्योंकि,प्रातः काल 5:44 पर एकादशी का समापन होगा।

 

 

 

द्वादशी तिथि लगेगी और मध्य रात्रि 3:00 बजे द्वादशी समापन होकर त्रयोदशी तिथि लग जाएगी। जिस कारण निर्जला एकादशी पर इन तीन तिथियों के मिलन का संगम होगा। जो कि बेहद लाभकारी है। ऐसे में इस दिन स्नान- दान, पूजा -पाठ, व्रत- उपवास का महत्व हजारों गुना बढ़ेगा। धर्म शास्त्रों के अनुसार एकादशी का निर्जला उपवास रखने से सभी प्रकार के पापों और तापो से मुक्ति मिलती है। इतना ही नहीं मृत्यु उपरांत मनुष्य मोक्ष की प्राप्ति सरलता से कर लेता है। वैसे तो वर्ष में 24 एकादशी आती है लेकिन अगर इस दिन व्रत किया जाए तो चौबीसों एकादशी के व्रत का फल अकेले निर्जला एकादशी का व्रत करने से प्राप्त हो जाता है। महाभारत कालीन भीमसेन ने भी इस व्रत को करने के बाद मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया था। इसलिए इस पर्व को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं।

 

 

 

 

-निर्जला व्रत के नियम

निर्जला एकादशी व्रत पूजा
निर्जला एकादशी का व्रत रखने के दौरान आप प्रातः काल स्नान करने के पश्चात सूर्य देवता को अर्घ दें. इसके बाद पीताम्बर (पीले वस्त्र) धारण करके भगवान विष्णु की अराधना करते हुए विष्णु सहस्त्रानाम स्त्रोत का पाठ करें. भगवान विष्णु मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर फूल, पंचामृत और तुलसी का पत्ता अर्पित करें. एकादशी का व्रत रखने वाले इस बात का विशेष ख्याल रखें कि यदि आप पूर्णतया स्वस्थ हैं तो बगैर जल पिए निर्जला व्रत रख सकते हैं। यदि आपका स्वास्थ नहीं साथ दे रहा है और आप बिना पानी के नहीं रह सकते हैं तो पानी में नींबू मिलाकर पी लें, अगर आप इसके बाद भी व्रत नहीं रख पाते हैं तो फल भी खा सकते हैं। और जो ज्यादा गंभीर रूप से ही बीमार है उनके लिए यह नियम लागू नहीं होते।

 

 

इन चीजों का करें दान

निर्जला एकादशी व्रत के दौरान गरीबों को अन्न, वस्त्र, बिस्तर, छाता और जल के पात्र का दान करें।
इस दिन ब्राम्हण को जूते का दान करना बहुत फलदायी होता है।
इस दिन पेड़ के नीचे पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें।
इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
ज्योतिषाचार्य- पंडित मुकेश मिश्रा

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Author: newsvoxindia

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