
बरेली | मां शब्द सुनने में भला छोटा शब्द हो लेकिन इसका महत्व दुनिया के हर बड़े शब्द के बराबर है | आज देश की एक बड़ी आबादी मदर्स दे बना रही है | तो वही युवा सोशल मीडिया पर अपने तरीके से अपनीं माँओ को शुभकामनाएं दे रहे है | बरेली में एक ऐसी मां है जो अपनी बेटी के लिए पिछले 20 साल से अपनी बेटी का सहारा बनी हुई है | वह हर रोज अपने बेटी के कामों से लेकर उसकी पढ़ाई लिखाई में मदद करती है ताकि दिव्यांग बेटी कभी अकेलापन महसूस नहीं करे और आगे चलकर वह आत्मनिर्भर हो जाए |

महिमा अपनी मां की मेहनत और लगन के चलते वर्ष 2020 में नीट की परीक्षा को पास चुकी है | आईवीआरआई में काम करने वाले शैलेन्द्र शाह की 20 बर्षीय बेटी महिमा सेरिवल पैलसी बीमारी से ग्रसित है , बीमारी के कारण उसके हाथ और पैर काम नही करते, वह पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर है । महिमा की मां स्मिता शाह हाउस वाइफ है और हो हर पल अपनी दिव्यांग बेटी का साया बनी रहती है । महिमा अपनी बीमारी के चलते अपने हाथ से एक कॉपी का पेज भी नहीं उठा सकती है |

दिव्यांग महिमा की मां स्मिता शाह अपनी बेटी के एक इशारे पर उसकी बात समझ जाती हैं ।स्मिता अपनी बेटी महिमा के कामों से लेकर उसके खान-पान पढ़ाई लिखाई के सभी कामों में मदद करती हैं , वह अपनी बेटी के साथ एक साए की तरह रहती हैं । बस बेटी के इशारा करते ही उसके बताए हुए कामों को मां स्मिता पल भर में कर देती हैं ।महिमा के दिव्यांग होने के बावजूद उसके हौसलों में कोई कमी नहीं है| महिमा ने इंटरमीडिएट में 80 परसेंट मार्क्स लाकर यह भी साबित किया था कि वह अपने मंजिल की ओर अग्रसर है | फिलहाल महिमा की मां स्मिता उनकी सबसे बड़ी ताकत है |




