
बरेली । अलखनाथ मंदिर नागा सम्प्रदाय का मंदिर है। यह मंदिर शहर के केंद्र में होने के चलते लोगो की आस्था का विशेष केंद्र है। अलखनाथ मंदिर के पास से किला नदी बहती है साथ मंदिर से सटा जंगल भी मंदिर के सौंदर्य को बढ़ाता है। अलखनाथ की स्थापना किसने और कब हुई बताना मुश्किल है ? लेकिन इस मंदिर का नाम बाबा अलखिया के नाम पर अलखनाथ पड़ा है। मंदिर में कई देवी देवताओं के मंदिर है लेकिन मंदिर की सबसे खास जगह शिवलिंग स्थापित जगह मानी जाती है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग के बारे में कहा जाता है यह स्वंय प्रकट हुए है। सावन में शिवलिंग के दर्शन के लिये जिले भर के लोग आते है।

अलखनाथ मंदिर परिसर में सावन माह में पैर रखने की जगह नही बचती है। इस मंदिर के बारे में एक कहावत यह भी है कि बरेली जिले का रहने वाला शख्स हरिद्वार के साथ किसी भी जगह से कांवड़ ले आये लेकिन उस शख्स ने अलखिया बाबा के दर्शन नही किये तो कांवड़ को पूरा नही कहा जा सकता। सावन के दिनों में यही वजह रहती है लोग बड़ी संख्या में कांवड़ लेकर अलखनाथ पहुंचते है और मंदिर में विश्राम करके अपनी यात्रा का अंतिम पड़ाव पूरा करते है। अलखनाथ मंदिर के बारे में लोगों की यह भी मान्यता है कि यहां बाबा भोले के जलाभिषेक करने से घर की समस्याएं दूर होती है और घर में खुशहाली आती है।




