
राजकुमार
बरेली। आज से दो सौ छब्बीस वर्ष पहले 1788 में अवध नवाब आशिफ उदाल्ला खां और ईस्ट इंडिया कम्पनी ने रामपुर स्टेट को खत्म करने के उद्देश्य एक षड्यंत्र रचते हुए रुहेला नवाब फैजुल्ला खां के समक्ष 15 लाख रुपए देने या रामपुर स्टेट खत्म करने का प्रस्ताव रखा। नवाब ने जंग से बचने के लिए 15 लाख रुपए देकर ईस्ट इंडिया कम्पनी और अवध नवाब के बीच षडयंत्र को खत्म कर दिया था । इसी बीच सन् 1794 में रूहेला नबाव फैजुल्ला खां का इंतकाल हो गया था | इसी दौरान गुलाम मोहम्मद को रामपुर स्टेट का नवाब बनाया गया लेकिन अंग्रेज गुलाम को पसंद नहीं करते थे। अंग्रेजो ने गुलाम को हटाने के लिए अपनी सेना भेजी तभी गुलाम को इस बात की जानकारी हो गई , गुलाम ने भी अपनी सेना अंग्रेजो से लड़ने के लिए भेज दी। फतेहगंज पश्चिमी में दोनों सेनाओं का आमना सामना हुआ जिसमें दोनों सेनाओं को काफी नुकसान हुआ और दोनों ओर से बड़ी संख्या में सैनिक मारे गए। रुहेला सरदार हाफिज रहमत खां और उनकी सेना ने कड़े मुकाबले में अंग्रेजों को हरा दिया इस तरह फतेहगंज काफी समय तक अंग्रेजों से मुक्त रहा।
रुहेलाओं ने अंग्रेजो को जमकर पहुंचाया था नुकसान
बताया जाता है कि रुहेलाओं के सिपह सलार नज्जू खां और बुलंद खां अपने कुछ साथियों के साथ जीत का जश्न मना रहे थे इसी दौरान ब्रिटिश फौज ने छिपकर हमला बोल दिया , इस हमले का सिपहसालार नज्जू और बुलंद खा और उनके साथियों ने डटकर लोहा लेते हुए ब्रिटिश फौज के 14 अफसर और 614 सिपाहियों को मार गिराया और अंत में बारूद खत्म होने के कारण सीने पर गोली खाकर शहीद हो गए, नज्जू और यादगार में इसी जगह पर इनको सुपुर्द ए खाक करके मकबरा बनाया गया। इसी मकबरे से कुछ दूरी पर पूर्व दिशा में जंग में मारे गए ब्रिटिश अफसर मेजर थामस बोल्टन, कैप्टन नार मैकलीपोड, जानमौवे, जान मौर डेंट, लेफ्टिनेंट एडमंडबेल्स,जान प्लमर, विलियम ओडल आदि को दफन करके एक स्मारक भी बनाया गया था|
मकबरे के पास युद्ध के मिलते है साक्ष्य
मकबरा के आसपास कई बार पुरातत्व विभाग द्वारा जांच व खुदाई करने पर ब्रिटिश सरकार के समय के पुराने सिक्के मिलने की भी बात सामने आती रही है।पुराने बुजुर्गों का यह भी कहना है कि जब भी बरसात का मौसम आता है तब यहां मकबरे के आसपास बहते पानी का रंग खून जैसा हो जाता है।
सपा ने मकबरे को दिया था नया रूप
2005 में सपा सरकार में नगर विकास मंत्री आजम खान ने चेयरमैन जहीरूद्दीन ने पहल पर 80 लाख रुपए देकर इसका सौंदर्यीकरण कराया था , रकम कम पड़ी तो सरकार ने 41 लाख मकबरे के लिए और जारी करने की बात कही परंतु यह रकम मिलने से पहले बसपा सरकार आ जाने के कारण रकम वापस ले ली गई और पुनः सपा सरकार आने पर नगर विकास मंत्री आजम खान ने चेयरमैन कुतुब भाई के पहल पर 65 लाख रुपये जारी किए, जिससे मकबरे की बाउंड्री वाल चारों तरफ फुलवारी आदि से सौंदर्यीकरण कराया गया है।
मकबरा होता जा रहा है खंडर
मकबरा प्रशासन की उदासीनता के चलते खंडर में तब्दील होता जा रहा है | मकबरे में पानी की टंकी है तो बिजली नहीं , मकबरे में बगीचा है पर माली नहीं है | मकबरे की दीवारों व गुम्बदपर लगा पत्थर भी गिरने लगा है साथ ही साथ शरारती बच्चों ने मकबरे का कीमती रेलिंग भी तोड़ दी है | मकबरे पर लगा दरबाजा टूटने लगा है पर इन बातों की की चिंता न तो स्थानीय नेताओं को है और न ही प्रशासन को है| यहां लोग इस ऐतिहासक स्थल को देखने के लिए पहुंचते है लेकिन कोई खास जानकारी जानकारी नहीं मिलने के अभाव में निराश होकर लोगो ने अब यहां आना छोड़ दिया है |











