योग स्वयं की, स्वयं के माध्यम से, स्वयं तक की यात्रा है” — शालिनी मिश्रा

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 बरेली ।अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 के अवसर पर राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल, मंडनपुर (मीरगंज, बरेली) की योग प्रशिक्षिका शालिनी मिश्रा ने भगवद गीता के अमर वाक्य “योग स्वयं की, स्वयं के माध्यम से, स्वयं तक की यात्रा है” को केंद्र में रखते हुए योग की प्रासंगिकता और उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि आत्मिक यात्रा है, जो शरीर, मन और आत्मा को एक सूत्र में पिरोता है। “आज योग को पूरी दुनिया भारत की सबसे बड़ी देन मानती है। यह न केवल शारीरिक लचीलापन और मजबूती प्रदान करता है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन भी देता है,”।

शालिनी मिश्रा ने बताया कि भगवद गीता में योग को जीवन की अनिवार्य प्रक्रिया बताया गया है, जो हर इंसान को आत्मबोध की दिशा में ले जाती है — चाहे उसकी विचारधारा, धर्म या सामाजिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो। इस वर्ष की थीम “स्वयं और समाज के लिए योग” इस बात को दोहराती है कि योग केवल व्यक्तिगत नहीं, सामाजिक कल्याण का भी माध्यम है।

उन्होंने बताया कि योग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति न केवल बीमारियों से दूर रह सकता है, बल्कि तनाव, चिंता और मानसिक थकावट से भी निजात पा सकता है। अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी, प्राणायाम और ध्यान जैसे अभ्यासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे यह क्रियाएं हमारे जीवन में स्थिरता और ऊर्जा लाती हैं।

शालिनी मिश्रा ने यह भी बताया कि योग अब सिर्फ एक अभ्यास नहीं रहा, बल्कि युवाओं के लिए एक सुनहरा करियर विकल्प भी बन गया है। “आज बीएससी, एमएससी और योग में सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले प्रशिक्षु स्कूलों, हेल्थ सेंटरों, कंपनियों, ऑनलाइन क्लासेस और स्वयं के प्रशिक्षण केंद्रों में प्रोफेशनल करियर बना रहे हैं,”।

अंत में उन्होंने सभी को आह्वान किया कि योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और इसे केवल एक दिवस तक सीमित न रखें। “योग एक यात्रा है जो हमें खुद से मिलवाती है, हमें बेहतर इंसान बनाती है और हमारे भीतर के संतुलन को जाग्रत करती है।

 

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Author: newsvoxindia

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