50 रुपये सदका-ए-फ़ित्र अदा करे मुसलमान : सज्जादानशीन

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मोहम्मद आदिल

बरेली। दरगाह आला हज़रत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) ने आज अपना बयान जारी करते हुए कहा कि सदका-ए-फ़ित्र रमज़ान में अदा किया जाता है । शरीयत ने मुसलमानों को हुक़्म दिया कि जो साहिबे निसाब (शरई मालदार) मुसलमान है, वो सदक़ा-ए-फ़ित्र की रकम ईद की नमाज़ से पहले जो इसके शरई हक़दार है उन तक पहुँचा दे । बीमारों को इस वक़्त दवाई, ऑक्सीजन की सख्त ज़रूरत है । ऐसे में जिस पर ज़कात फ़र्ज़ और सदका-ए-फ़ित्र वाजिब है वो इस रकम को जल्द से जल्द जो इसके शरई मुस्तहिक़ (ज़रूरतमंद) है उन तक पहुँचा दे । लोग सदक़ा-ए-फ़ित्र ईद की नमाज़ से पहले अदा करते थे । लेकिन देश मे आर्थिक संकट को देखते हुए इसके अदा करने का ये सही वक्त है । ज़कात मुसलमानो पर अल्लाह ने फ़र्ज़ की वही सदका ए फ़ित्र वाजिब । अमूमन लोग सदका ए फ़ित्र को ज़कात समझ लेते है जबकि ये दोनों अलग अलग है । ज़कात कुल माल पर 2.5% अदा करनी है वहीं सदक़ा ए फ़ित्र 2 किलो 45 ग्राम गेहूं या इसकी बाजार मूल्य की कीमत गरीब, बेवा, बेसहारा, यतीमों को अदा करनी है । इस वक़्त बरेली में अच्छी क्वालिटी के 2 किलो 45 ग्राम गेहूँ की कीमत लगभग 42-43 रुपए है, इसकी कीमत बड़ा कर तो दे सकते है अफ़ज़ल है । लेकिन कम नही होनी चाहिए । अवाम की आसानी के लिए इसकी कीमत तय कर दी गयी है । बरेली में इसकी कीमत 50 रुपए प्रति व्यक्ति तय की गई है इससे बड़ा कर जितना चाहे दे सकते है हाँ अगर तय बजन से कम अनाज या रकम दी तो सदका ए फ़ित्र अदा न होगा । देश के बाकी शहरों के लोग अपने यहाँ गेहूँ की कीमत मालूम कर उसकी कीमत के मुताबिक अदा करे । दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने मुफ्ती अहसन मियां के हवाले से बताया कि देश मुश्किल वक़्त से गुज़र रहा है । लोगो की माली हालात (आर्थिक स्थिति) अच्छी नही है । लोगो के पास रोज़गार नही है । गरीबो को दो वक्त की रोटी मय्यसर नही हो पा रही । इस बीमारी से जूझ रहे लोगो को ऑक्सीजन व दवाई के लिए पैसों की दरकार है । मालदार मुसलमान जिसको अल्लाह ने माल-ओ-दौलत से नवाज़ा है वो जल्द से जल्द ज़कात और फितरे की रकम जो इसके मुस्तहिक़ हो उन तक पहुँचा दे ।

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Author: cradmin

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