44 अंत्योदय राशन कार्डों के निरस्तीकरण से मचा हड़कंप, ग्रामीणों ने लगाए लेखपाल पर पक्षपात के आरोप

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बरेली । मीरगंज तहसील क्षेत्र के गांव पिपरिया में एक साथ 44 अंत्योदय राशन कार्डों के निरस्तीकरण से हड़कंप मच गया है। अचानक कार्ड निरस्त होने से पीड़ित ग्रामीण महिला-पुरुष तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं और प्रशासन पर गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर गरीबों का हक छीनने के आरोप लगा रहे हैं।

 

प्रशासनिक कार्रवाई से आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा कि भूमिहीन और मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले सैकड़ों लोग इस फैसले से प्रभावित हुए हैं। लेखपाल की रिपोर्ट पर संदेह जताते हुए ग्रामीणों ने मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच की मांग की है।

 

पीड़ित ममता देवी, जो करीब एक दशक से विधवा हैं, ने बताया कि उनके पास कोई जमीन नहीं है, पांच छोटे-छोटे बच्चे हैं और मजदूरी से ही उनका परिवार पलता है। उन्होंने कहा, “अब राशन कार्ड भी छीन लिया गया, तो हम खाएंगे क्या?”

इसी तरह नन्हे लाल ने आरोप लगाया कि उनका राशन कार्ड इसलिए काट दिया गया क्योंकि लेखपाल की रिपोर्ट में पत्नी को मायके में रहना बताया गया, जबकि वास्तव में उसकी पत्नी और बच्चे उसी गांव में उसके साथ रहते हैं। “मैं रिक्शा चलाकर किसी तरह बच्चों का पेट पालता हूं, और अब सरकार ने आखिरी सहारा भी छीन लिया है।”

इस मामले में एसडीएम मीरगंज तृप्ति गुप्ता ने स्पष्ट किया कि 44 अंत्योदय राशन कार्डों की जांच दो बार कराई गई थी। जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर ही नियमानुसार अपात्र पाए गए लाभार्थियों के कार्ड निरस्त किए गए हैं। यह निर्णय जांच रिपोर्ट के अनुसार पूरी तरह उचित है।

हालांकि, तहसील कार्यालय में मौजूद पूर्ति निरीक्षक से संपर्क नहीं हो सका। कार्यालय पर मौजूद कर्मियों ने बताया कि वे किसी अन्य जांच में बाहर गए हुए हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि लेखपाल की जांच पर पुनर्विचार किया जाए, बाहरी स्वतंत्र टीम से दोबारा सत्यापन कराया जाए और जब तक जांच पूरी न हो, तब तक कार्ड बहाल किए जाएं। साथ ही जांच में लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

 

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Author: newsvoxindia

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