बुराई करने और सुनने से बचने का नाम ही रोजा है : अताउर रहमान

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अताउर्रहमान-पूर्वमंत्री यूपी सरकार

बरेली । रमज़ान बरकतों का महीना हैं,रमज़ान दुसरो की मदद करने की सीख देता हैं,जरूरतमंदों की मदद करने से रब खुश होता हैं, लोगों के लिये भलाई करते रहना चाहिये,नेकियों के रास्ते पर चलकर ही कामयाबी हासिल होती हैं,सुबह सादिक सूर्योदय से पहले से लेकर गुरूब सूर्यास्त तक अपने आपको खाने-पीने से रोके रखना रोजा कहलाता है। मूंह के रोजे के साथ-साथ हाथ, कान, नाक, जबान व आंखों का भी रोजा होता है। रोजे की हालत में किसी की बुराई करने व सुनने, बुरा देखने,बुरा करने से बचने का नाम ही रोजा है।मुसलमानों में परहेजगारी पैदा करने का बेहतरी नजरिया है कि मुसलमान सिर्फ अल्लाह की रजा के लिए साल में एक महीना अपने खाने-पीने, सोने-जागने के वक़्त में तब्दीली करता है। वह भूखा होता है लेकिन खाने-पीने की चीजों की तरफ नजर उठा कर नहीं देखता है। रमजान का महीना मुसलमानों के सब्र के इम्तिहान का खास महीना है। इसलिये बन्दों को ज़्यादा से ज़्यादा इबादत और लोगों की मदद करना चाहिये ताकि रोज़े के बाद जो ईद का तोहफा अल्लाह ने दिया हैं उसकी खुशियां सभी लोग मिल जुलकर मना सकें,आज सारी दुनिया के लोग कोरोना नामक गम्भीर बीमारी से जूझ रहे हैं हम सब रब की बारगाह में दुआं करें हमारे मुल्क और सभी शहरों के लोगों को कोरोना जैसे सभी बीमारियों से निजात मिले।

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Author: cradmin

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