मज़हब-ए-इस्लाम ने इंसानियत का पैगाम दिया , इसलिए सभी की मदद करे : सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी

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बरेली | कोरोना ने इंसानी जिंदगी को पटरी से उतार दिया है | जिसके चलते आदमी का रोजगार के साथ स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल हो रही है | वही सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे है | इस सम्बन्ध में दरगाह आला हज़रत पर  के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) ने  कहा कि मज़हब-ए- इस्लाम ने हमे इंसानियत का पैगाम दिया । यही पैगाम अल्लाह के रसूल और हमारे खानदान के बुजुर्गों का था । बिना किसी मज़हबी भेदभाव इंसान की मदद करने का हुक़्म दिया गया । फिर चाहे वो इंसान हिन्दू हो या मुसलमान, सिक्ख या ईसाई । मेरे दादा आला हज़रत व मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द के पास जो भी मदद को आया उसकी उन्होंने बिना मज़हब (धर्म) जाने  मदद की । यही इस्लाम की सही तस्वीर है । दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया की मुफ्ती अहसन मिया ने मुल्क़ भर के मुसलमानों के नाम खास अपील जारी करते हुए कहा कि हम इंसानियत के पैरोकार है । अपनो बुजुर्गों के बताए रास्तों पर चलते हुए हमें सबकी मदद करनी है । फिर चाहे मदद मांगने वाला हिन्दू हो,मुसलमान हो, सिक्ख हो या ईसाई हमें मदद को आगे बढ़ना है । बीमार और भूखों को हमारी ज़रूरत है ।  किसी के पास रुपये- पैसे है तो वो उससे मदद करे । जिसके पास राशन है राशन से मदद करे ।  कारोबारी अगर ऑक्सीजन, दवाई, राशन, सब्जी का कारोबार करते है ऐसे लोग जमाखोरी न करते हुए उनके मुनासिब दामों में ज़रूरतमंदों को मुहैय्या करा दे । यही दीन की सच्ची खिदमत होगी । हम मज़हब व हम वतन भाईयों को आज हमारी ज़रूरत है ।सभी देशवासियों को आज दिखाने का वक़्त है कि जब-जब हमारे मुल्क में मुश्किल घड़ी आयी और हम सब कन्धे से कंधा मिलाकर  साथ आये जैसे की आज़ादी के वक़्त में हम सब साथ आये थे  । नफरत को मुहब्बत से ही जीता जा सकता है । हमारी छोटी सी मदद किसी के बड़े काम आ सकती है । उन्होंने यह भी कहा कि बिना ज़रूरत घरों से न निकले । बहुत ज़रूरी होने पर ही घरों से निकले  साथ ही स्वास्थ विभाग की तरफ कोविड की दी गई  गाइड लाइन का पालन करे । 

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Author: cradmin

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