
बरेली। कोरोना काल में जहां आम आदमी सरकार की गाइड लाइन को मानते हुए घर में है। वही स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोग समाज के सामने एक से बढ़कर एक उदाहरण पेश कर रहे है। ऐसा ही कुछ मामले बरेली के 300 बेड कोविड हॉस्पिटल में देखने को मिल रहे है।

एक शख्स ने अपने फर्ज को निभाने के लिए काफी समय से घर जाना छोड़ दिया है तो अस्पताल को ही अपना घर बना लिया है। ऐसा ही एक मामला कोविड हॉस्पिटल के फार्मासिस्ट ऋषभ माहेश्वरी का है। ऋषभ माहेश्वरी ने कोविड अस्पताल को करीब 9 महीने पहले उस समय जॉइन किया था। जब कोविड अस्पताल में स्टाफ की कमी थी। तब से ऋषभ ने एक फार्मासिस्ट होने की जिम्मेदारी के साथ उन्होंने वह सभी जिम्मेदारी निभाई जो मरीज की जरूरत थी। ऋषभ ने मरीज को थैरेपी देने के साथ कैथ लगाने का काम भी डॉक्टर की देखरेख में किया।

ऋषभ बताते है कि पिछले दस महीनों में उन्हें ढंग से सोने को नहीं मिला है। कभी कभी ऐसा होता है कि घर पहुंचते ही मरीज की तबियत बिगड़ने पर तुरंत वापस आना पड़ता है। ऋषभ ने यह भी बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में उन्होंने अपने नजदीकियों को खोया है। पहले उन्होंने अपने सगी चाची, फिर मामी जी , चाचा जी को कोविड के चलते खोया लेकिन वह अपनों को मरीजों की देखभाल करने के चलते कंधा नहीं दे सके। लेकिन फिर भी वह अपनी जिम्मेदारी से खुश है। ऋषभ की पत्नी रूबी बताती है कि उन्हें नहीं लगता है कि उनके पति ने पिछले महीनों में कोई छुट्टी ली हो, कभी कभी ऐसा भी हो जाता है कि बच्चे अपने पिता का सात -सात दिन तक चेहरा नहीं देख पाते। ऋषभ के साथ काम करने वाले भी डॉक्टर यह कहते सुने जाते है कि ऋषभ अब तो छुट्टी ले लो। लेकिन ऋषभ अपने काम की धुन में खोए हुए नजर आते है। उनका एक ही मकसद है उनके अस्पताल से मरीज ठीक होकर जाए क्योंकि उनका परिवार उनका इंतजार कर रहा है।




