
उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर में खेली जाने वाली होली अपने आप में अलग तरीके की होली है | यहां लाट साहब का जुलूस बड़ी शान सौकत से साथ निकाला जाता है | बैसे तो रंगां का त्यौहार होली और उसे मनाने के तरीके पूरे देश में अगल अलग है। यहां कही फूलों से होली खेली जाती है तो कही लाठीमार होली खेली जाती है लेकिन शाहजहांपुर में होली खेलने की परम्परा सबसे अनूठी है। यहां जूते मार कर होली खेली जाती है। यह जूतेमार होली अंग्रेजी के प्रति अपना आक्रोश प्रकट करने के लिए फिरंगियों का एक प्रतीक लाट साहब मानकर उसे जूते से पीटा जाता है जिसे लाट साहब के जुलूस के नाम से भी जाना जाता है |लाट साहब के बारे में कहा जाता है कि वह नवाब था और अंग्रेजो के करीबी होने के चलते वह स्थानीय लोगो पर तरह तरह के जुल्म करता था| संवेदनशील माने जाने वाले लाट साहब के जुलूस में पुलिस बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जाती है। शाहजहांपुर में हुड़दंगियों का बड़ा रेला लाट साहब के जुलूस में दिखाई देता है और भैंसा गाड़ी पर बैठाकर जिस व्यक्ति को जूते से पीटा जाता है उस व्यक्ति को आज लाट साहब कहा जाता है।




