बरेली।बरेली क्लब मैदान में आयोजित 30वें उत्तरायणी मेले का रंगयात्रा के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मेले का उद्घाटन करना था, लेकिन निजी कारणों के चलते वह बरेली नहीं पहुंच सके। सीएम की अनुपस्थिति से यहां मौजूद उत्तराखंडी समाज के लोगों में कुछ निराशा जरूर देखने को मिली, हालांकि मेले की भव्यता और सांस्कृतिक रंग में कोई कमी नहीं आई।

उत्तरायणी जन कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय मेले की शुरुआत शहर में निकाली गई रंग-बिरंगी रंगयात्रा से हुई। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों, ढोल-दमाऊ और रणसिंघा की गूंज के बीच रंगयात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई मेले स्थल तक पहुंची, जहां लोगों ने तालियों के साथ कलाकारों का स्वागत किया।

मेले का विधिवत उद्घाटन महंत मंडलेश्वर स्वामी वीरेन्द्रानंद महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। उन्होंने उत्तरायणी पर्व और मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से जोड़े रखने का सशक्त माध्यम हैं।
रंगयात्रा में उत्तराखंड के प्रसिद्ध छोलिया नृत्य ने विशेष आकर्षण का केंद्र बनाया। कलाकारों ने ढोल-दमाऊ, रणसिंघा और मुरली की मधुर धुनों पर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को उत्सवमय बना दिया। बड़ी संख्या में उत्तराखंडी समाज के लोग रंगयात्रा में शामिल होकर मेले स्थल तक पहुंचे।
मेले में उत्तराखंड के हस्तशिल्प, पारंपरिक आभूषण, ऊनी वस्त्र और पहाड़ी व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए हैं, जहां लोग राज्य की समृद्ध लोकसंस्कृति और स्वाद से रूबरू हो रहे हैं। आयोजकों के अनुसार उत्तरायणी मेला केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का मंच है।
तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, लोकनृत्य और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।



