बरेली के किला क्षेत्र में रेलवे की पटरी से सटी एक छोटी-सी पकौड़ी की दुकान आज भी अपने पुराने स्वाद और परंपरा के लिए जानी जाती है। यह दुकान केवल पकौड़ियां बेचने की जगह नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों की मेहनत और विरासत की पहचान है। इस दुकान की शुरुआत सत्यपाल शर्मा के पिता, जिन्हें इलाके में लोग प्यार से चाचा कहकर बुलाते थे, ने की थी।

उस समय संसाधन सीमित थे, लेकिन लकड़ी की भट्टी पर बनने वाली पकौड़ियों का स्वाद लोगों के दिलों में बस गया। समय के साथ जिम्मेदारी बदली और अब यह दुकान सत्यपाल शर्मा और उनके भाई के बेटों द्वारा संयुक्त परिवार की देखरेख में चलाई जा रही है। परिवार के सदस्य बारी-बारी से दुकान संभालते हैं, ताकि परंपरा भी बनी रहे और रोज़गार भी चलता रहे।

आज के दौर में जहां अधिकतर जगह गैस पर पकौड़ियां बनती हैं, वहीं इस दुकान पर आज भी लकड़ी की भट्टी जलती है। भट्टी की आंच और लकड़ी की सौंधी खुशबू पकौड़ियों को खास बना देती है। यहां पालक, मिर्च, बैंगन, आलू सहित कई तरह की सब्जियों से पकौड़ियां बनाई जाती हैं। हर दिन हजारों की संख्या में पकौड़ियां बिकती हैं और स्वाद के शौकीन लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं।
सुबह से शाम तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है और लोग कहते हैं कि यहां की पकौड़ियों में आज भी वही पुराना, देसी स्वाद मिलता है। यह दुकान बरेली की उस संस्कृति को आज भी जीवित रखे हुए है, जहां मेहनत, परिवार और परंपरा एक साथ कढ़ाही में उतरते हैं और निकलता है बेमिसाल स्वाद।



