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शुभ संयोगों की त्रिवेणी में होगी मां सरस्वती की पूजा,

ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा 

बरेली। ज्ञान बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा का पावन पर्व  इस बार 5 फरवरी शनिवार के दिन पड़ रहा है।शास्त्रों में इसे बसंत पंचमी, बागेश्वरी जयंती भी कहते हैं। यह पर्व माघ मासके शुक्ल पक्ष पंचमी में मनाया जाता है। पंचमी तिथि का मान इस बार सूर्योदय से लेकर पूरे दिन और रात्रि तक व्याप्त रहेगा।अगर किसी की कुंडली में विद्या का योग नहीं है, तो उसे बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा अर्चना करनी चाहिए। इससे उसकी शिक्षा संबंधी समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं। बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है। कहते हैं इस दिन बगैर किसी परामर्श के विवाह मांगलिक कार्य व नवीन कार्य किए जा सकते हैं। बसंत पंचमी अंग्रेजी कैलेंडर 2022 का पहला अबूझ मुहूर्त है। इस दिन ज्ञान प्राप्ति के लिए विशेष साधना की जाती है। इस दिन शिशु के लिए शिक्षा की शुरुआत करानी चाहिए। बसंत पंचमी का पावन पर्व बसंत ऋतु आगमन का भी सूचक माना गया है। इस दिन से मौसम में खास परिवर्तन भी होने लगता है। अबूझ मुहूर्त होने के कारण विद्यारंभ संस्कार और विवाह संस्कार इस दिन भारी मात्रा में किए जाते हैं।

*ऐसे बना त्रिवेणी योग का शुभ संयोग*

इस बार बसंत पंचमी के दिन तीन शुभ योगों की त्रिवेणी का निर्माण हो रहा है विद्यार्थी, साधकों, भक्तों और ज्ञान चाहने वालों के लिए दिन बहुत ही खास है। इस दिन सिद्ध नामक शुभ योग है। जो देवी सरस्वती के उपासको को सिद्धि और मनोवांछित फल देगा। इसके साथ ही सरस्वती पूजा के दिन रवि नामक योग भी बन रहा है। जो सभी अशुभ योगों के प्रभाव को दूर करने वाला माना जा रहा है। इन सब के साथ ही सरस्वती पूजा के दिन बुध और सूर्य एक साथ रहने के कारण बुधादित्य योग का निर्माण होगा। जो भक्तों के लिए चमत्कारिक फल प्रदान करने बाला होगा। इन शुभ योगों  की त्रिवेणी में मां सरस्वती की कृपा भक्तों पर खूब बरसेगी।

*त्यौहार की पौराणिक मान्यता*

सृष्टि के लिए ब्रह्मा जी ने जब सभी जीव, जंतुओं और मनुष्यों की रचना की। तभी ब्रह्मा जी के कमंडल के जल से सरस्वती देवी का प्रादुर्भाव हुआ। तब देवी ने वीणा का मधुर नाद किया। जिससे संसार के सभी जीवो को वाणी प्राप्त हुई। इसलिए इस पर्व को ज्ञान और विद्या से जुड़ा पर्व माना जाता है।

*बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त* 

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि शनिवार, 5 फरवरी को सुबह 03 बजकर 47 मिनट से प्रारंभ होगी, जो अगले दिन रविवार, 6 फरवरी को सुबह 03 बजकर 46 मिनट तक रहेगी। बसंत पंचमी की पूजा सूर्योदय के बाद और पूर्वाह्न से पहले की जाती है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 07 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट यानि 5 घंटे 28 मिनट तक का रहेगा।

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