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शक्ति, मर्यादा, धर्म निष्ठि का प्रतीक है विजयादशमी का पर्व

Ravan
ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा 

बरेली।अश्विन मास शुक्ल पक्ष दशमी को विजयादशमी के पावन पर्व मनाया जाता है। इस बार विजयादशमी का पावन पर्व 15 अक्टूबर शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह पर्व शरद नवरात्र के 10वें दिन पड़ता है। इसी दिन शारदीय नवरात्र के नौ दुर्गा पूजन का आखिरी दिन होता है।इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के तौर पर मनाया जाता है। विजयादशमी के दिन ही शस्त्र पूजा करने का विधान भी है। मान्यताओं के अनुसार अगर इस दिन शस्त्र पूजा की जाए। तो वर्ष भर चारों ओर से रक्षा होती है। शस्त्रों की पूजा मां भगवती को समर्पित मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि शस्त्रों की पूजा करने से भी भगवती की कृपा से शक्ति, ऊर्जा,बल सरलता से प्राप्त होता है।इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था,तो मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार। तबसे लेकर अब तक हर वर्ष बुराई के तौर पर रावण का पुतला जलाया जाता है। देश भर में रामायण मंचन का इसी दिन रावण दहन के साथ समापन होता है।

-विजयदशमी का इतिहास

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित राम चरित मानस के अनुसार, लंकापति राक्षस राज रावण ने वनवास के दौरान भगवान श्रीराम की पत्नी सीता का अपहरण कर लिया था। वह उन्हें अपने राज्य लंका ले गया और बंदी बनाकर रखा। भगवान राम ने लक्ष्मण जी के साथ सीता जी की खोज शुरू की। रास्ते में उन्हें जटायु ने बताया कि रावण सीता जी का हरण करके लंका ले गया है।इसके बाद श्रीराम को बजरंगबली हनुमान, जामवंत, सुग्रीव और तमाम वानर मिले। इन सबको मिलाकर उन्होंने एक सेना बनाई।जिसके साथ रावण से युद्ध किया। दस सिर वाले दशानन कहे जाने वाले राक्षस रावण को युद्ध के दसवें दिन मार दिया।तब से  दशमी को विजयदशमी के तौर पर मनाया जाता है। देश भर में 10 सिर वाले रावण का पुतला दहन किया जाता है।

-महिषासुर का वध

रावण दहन के अलावा इसी दिन देवी दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध भी किया था। दुर्गा सप्तशती में मां दुर्गा और महिषासुर के वध की कथा बताई गई है। मां दुर्गा ने आश्विन शुक्ल की दशमी तिथि को महिषासुर का वध किया था।इसके बाद सभी देवताओं ने मां दुर्गा की विजय पर उनकी पूजा अर्चना की थी।इसलिए इस तिथि को विजयदशमी कहते हैं।

शक्ति और मर्यादा का प्रतीक

चूंकि दशहरा के दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया और श्रीराम ने रावण पर जीत हासिल की इसलिए इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मानते हैं। श्रीराम मर्यादा और आदर्श के प्रतीक हैं, तो वहीं मां दुर्गा शक्ति का प्रतीक हैं इस पर्व से लोगों को शक्ति के साथ मर्यादित, धर्मनिष्ठ और उच्च आदर्शों के साथ जीवन जीने की सीख मिलती है।

-विजयादशमी मुहूर्त

 दशमी तिथि 14 अक्टूबर 2021 को शाम 6:52 बजे शुरू होगी और 15 अक्टूबर  को शाम 6:02 बजे समाप्त होगी। इस साल विजय मुहूर्त दोपहर 2:02 बजे शुरू होगा और दोपहर 2:48 बजे तक चलेगा। वहीं अपर्णा पूजा का मुहूर्त दोपहर 1:16 बजे शुरू होगा और दोपहर 3:34 बजे समाप्त होगा। 

            

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