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मौलना ने सपा समर्थित प्रत्याशी का हालचाल जानकर कर दिया बड़ा सवाल, यह बयान भाजपा -बसपा की राह कर सकता है आसान,

 

बरेली। निकाय चुनाव में राजनीति जमकर हो रही है। कही जनता1 विकास के नाम पर अपने पार्षद से सवाल कर रही है तो कही समर्थन का खेल चल रहा है। सभी का एक ही मकसद है कि वह अपने जुड़े मुद्दे पर अपने प्रत्याशी का ध्यान अपनी ओर खींच सके।

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ऐसा ही कुछ आलाहज़रत से ताल्लुक रखने वाले मौलना शाहबुद्दीन ने निर्दलीय प्रत्याशी को पत्र लिखकर कुछ बड़े सवाल कर दिए है। उन्होंने अपना पत्र में कुछ इस तरह लिखा और कुछ आरोप भी लगाए है। मौलना लिखते है कि
उम्मीद है कि आप खैरियत से होंगे, इसी शहर में हम और आप रहते हैं और एक जिम्मेदार होने के नाते जिम्मेदारियां भी निभाते है, जैसा कि आप जानते हैं कि मैं एक मज़हबी रहनुमा, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक होने के साथ ही आपका शुभ चिंतक रहा हूं, इसी वजह से कुछ बातें और कुछ सवालात आपसे करना चाहता हूं, ये वो सवालात है जो मुस्लिम कौम आपसे पूछ रही है।

 

बरेली को 1989 में पहली बार नगर निगम का दर्जा मिला और श्री राजकुमार अग्रवाल पहले मेयर बने, फिर श्री सुभाष पटेल 1995 में आप 2 बार यानि 2000 और 2012 में मेयर रहे बीच में श्रीमती सुप्रिया ऐरन 2006 में मेयर बनी। डॉ उमेश गौतम 2017 में मेयर की कुर्सी पर बैठे।

 

आपको याद होगा कि हमने आपका 2 बार मेयर चुनाव और 1 बार विधानसभा चुनाव खुलकर लड़ाया, मुसलमानों ने दिल खोलकर आपको वोट दिया, आप कामियाब हुए मगर जो आपने अपनी कोर कमेटी बनाई उसमें किसी मुसलमान को जगह नही दी।

 

निहायत अफसोस के साथ ये कहना पड़ा रहा है कि हमारी मुस्लिम कौम बहुत भोली भाली है, आपकी रणनीत को नहीं समझ पाई। पहले भी आप भाजपा से टिकट मांग रहे थे और टिकट हो भी गया था भाजपा मुख्यालय लखनऊ से हरी झंडी पाकर जब आप लखनऊ से बरेली के लिए रवाना हुए तो रास्ते से ही आपका टिकट भाजपा ने काट दिया फिर सपा का समर्थन लेकर दो बार हमने आपको मेयर की कुर्सी पर बैठाया, अब तीसरी बार भी लखनऊ दिल्ली के बड़े बड़े भाजपा नेताओं के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद भी टिकट नहीं मिला तो फिर सपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव के मैदान में आ गए। इससे ये जाहिर होता है कि आपके दिल व दिमाग में भारतीय जनता पार्टी बसी हुई है, आखिर ऐसा क्यों? आपको सीधे सीधे समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने में क्या परहेज़ है?

 

बरेली के मुसलमान आपसे ये पूछते हैं कि पूरे 5 साल में मुसलमानो पर बड़ी मुसीबते आयी और परेशानियां का शिकार हुए, रुहेलखंड युनिवर्सिटी के पूछे बुलडोजर चलाकर एक धार्मिक स्थल को शहीद कर दिया गया, बिचपुरी के गरीबों के माकानात तोडे़ गये, इज्जतनगर रेलवे स्टेशन पर स्थित एक धार्मिक स्थल को तोड़ने के लिये अधिकारियों ने नोटिस जारी कर दिया, इसी तरह बहुत सारे मुसलमानों के मुद्दे शहर में उत्पन्न हुए, मुसलमानों ने ये तमाम मसाइल खुद हल किये मगर समाजवादी पार्टी का कोई भी नेता और खुद आप भी दर्द व दुःख में मुसलमानो के साथ नहीं खड़े हुए, ऐसी की ठंडी ठंडी हवाएं आपको ज्यादा महबूब नज़र आई। आखिर क्या वजह रही कि आपने शहर के मुसलमानो के मसाइल पर खामोशी इख्तियार की, और किसी भी मुस्लिम मुद्दे पर आप मुसलमानों के साथ खड़े क्यों नहीं हुए?

 

अब ऐसी सुरते हाल में मुस्लिम कौम आपको समर्थन क्यों करे? आप सिर्फ इलेक्शन के दरमियान मुसलमानों के घरों पर वोट मांगने के लिए जाते हैं और जब मुसलमान आपको कुर्सी पर विराजमान कारा देता है तो फिर आपके घर के दरवाज़े मुसलमानों के लिए बंद हो जाते है।

 

उलमा और मुस्लिम संगठनों के जिम्मेदारान से मिलने के लिए आपके पास वक्त नहीं होता है, भुक्त भोगी लोगों का कहना है कि आप घर के अंदर होते हैं और कोई मुसलमान मिलने के लिए पहुंच जाता है तो आप मिलने से मना करा देते है आखिर ऐसा क्यों?

कहने के‌ लिए बातें तो बहुत है मगर उक्त चंद बातों पर अपने पत्र को विराम देता हूं।

 

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