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राजनीति

बहेड़ी विधानसभा में मुस्लिम और कुर्मी के हाथ में विधायक बनाने की चाबी !

भीम मनोहर 

बरेली जिले की बहेड़ी विधानसभा विकास के नजरिये से बेहद पिछड़ी हुई विधानसभा है | यह विधानसभा परसीमन के चलते पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा भी है | यह  उत्तराखंड से सटी बरेली जिले की विधानसभा है | इस विधानसभा क्षेत्र में विकास की तमाम संभावनाएं है | बहेड़ी में दोमट मिटटी में गन्ने की पैदावार इसी क्षेत्र में होती है | बताया जाता है कि बहेड़ी की नगरीय संरचना रामपुर के नवाबी दौर में रखी गई थी | बहेड़ी की मुसलमानी आबादी में रुहेला पठान , तुर्क और शाह जाति के लोग अधिक रहते है | कहा यह भी जाता है कि दलदल इलाके में मिलने वाली बहेड़ा घास के के चलते इस जगह का नाम बहेड़ी रखा गया। 

बहेड़ी विधानसभा उत्तराखंड की सीमाओं से बेहद करीब भारत -पाक के  बंटवारे के समय पंजाब और हरियाणा से पलायन कर आये जाट और सिक्ख   यहां के सम्पन्न किसानों में गिने जाते हैं। नगरपालिका बहेड़ी क्षेत्र में बासठ फीसदी मुसलमान आबादी है। यहॉ रिछा क्षेत्र में बने अरबी विश्वविद्यालय अलजामिया तुल क़ादिरया उर्दू, अरबी और फारसी तालीम का बड़ा  केंद्र है जहॉ देश भर से सुन्नी मुसलमान दीनी और दुनियावी तालीम लेते हैं। यूपी उत्तराखण्ड एक होने के समय बहेड़ी को कुमॉऊ मण्डल का प्रवेश द्वार भी कहा जाता था और तत्कालीन दौर में यह दोनों राज्यों के लिए व्यापार का बड़ा केन्द्र भी रहा , हालाँकि उत्तराखण्ड  से अलग होने का दंश बहेड़ी के व्यापारियों को भी झेलना पड़ा। बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र में बहेड़ी नगर पालिका, देवरनिया नगर पंचायत, रिछा नगरपंचायत, शेरगढ नगर पंचायत, और फरीदपुर नगर पंचायत की 385  ग्राम पंचायते शामिल हैं।

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बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र की समस्याएं

उद्योग धंधों की कमी 

शिक्षा स्वास्थ्य केंद्रों की कमी 

खेल के मैदान का अभाव 

खराब  रोड़ 

युवाओं का रोजगार की तलाश में पलायन 

अवैध स्लॉटर हाउस

बहेड़ी विधानसभा का राजनैतिक इतिहास

बहेड़ी विधानसभा के लिए पहला निर्वाचन 1957 में हुआ था और लगातार तीन 1957 ,1962 और 67 में यह सीट इन्डियन नेशनल  कांग्रेस  की झोली में रही। 1969 के चुनाव में यहॉ क्रॉति दल ने इस सीट पर कब्जा जमाया। 1974 और 1977 के चुनाव में यहॉ फिर से कॉग्रेस ने अपना कब्जा जमाया। 1980 में अम्बा प्रसाद ने निर्दलीय चुनाव लड़कर बहेड़ी विधानसभा से प्रतिनिधित्व किया और फिर वह कॉग्रेस में शामिल हो गये। 1985 का चुनाव अम्बा प्रसाद ने कॉग्रेस के बैनर तले जीता। 1989 में मंजूर अहमद निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे और कांग्रेस  के अम्बा प्रसाद की राजनैतिक पारी को उन्होने विराम दिया। 1991 के आम चुनाव में भाजपा से हरीश चन्द्र गंगवार ने यहॉ चुनावी समीकरण बदले और बहेड़ी विधासनभाक्षेत्र में कमल ने दस्तक दी।

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 बाबरी विध्वंश के बाद बदले समीकरणों में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर चुके मंजूर अहमद ने 1993 में चुनाव जीता। 1996 के चनुाव में हरीश चन्द्र ने फिर वापसी की और भाजपा को जीत दिलाई। 2002 के आम चुनाव हुए जिसमें समाजवादी पार्टी से मंजूर अहमद ने एक बार फिर इस सीट पर अपना कब्जा जमाया। यहॉ 2002 के अंत में विधानसभा के लिए उपचुनाव हुए और वर्तमान विधायक अताउर रहमान ने बसपा के बैनर तले चुनाव लड़ा और समाजवादी पार्टी की मुमताज जहॉ को चुनाव हराकर बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया। उपचुनाव के बाद फिर 2007 के चुनाव में भाजपा के छत्रपाल सिंह ने इस सीट को अपनी झोली में डाला। इस दौरान अताउर रहमान ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन की और 2012 का आम चुनाव साइकिल के बैनर तले लड़ा। उन्होने भाजपा के छत्रपाल सिंह को मात्र अठारह मतों से मात दी। बताते हैं कि भाजपा की जिद पर पिछले चुनाव में दो बार रिकाउन्टिंग की गयी लेकिन नतीजा नहीं बदला। भाजपा के छत्रपाल सिंह अपनी हार पचा नहीं सके, उन्होने कोर्ट की शरण ली और आज भी यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। 2017 में छत्रपाल गंगवार में भाजपा से विधायक बने और  2022 यूपी विधानसभा  चुनाव से पहले योगी सरकार में राजस्व मंत्री बने , हालाँकि यहां वर्तमान में भी विकास को पंख नहीं लग सके | 

जानिए किस आबादी के कितने है वोटर ?

कुल वोटर :  3,64985 

कुल बूथ : 442 

मुस्लिम : 1,65,000 

कुर्मी समाज : 50,000 

मौर्य : 25,000 

कश्यप : 15,000 

राठौर : 8,000 

सिक्ख : 7,500 

जाट : 7,000 

बढ़ई शर्मा : 6,000 

ठाकुर : 5,000 

गुर्जर : 4,000 

पाल : 4,000 

लोधी किसान : 3,500 

ब्राह्मण : 3,000 

भुर्जी : 3,000 

यादव 2,500 

बनिया : 2,500 

कायस्थ : 2,000 

रस्तोगी : 2,000 

बंगाली : 2,000 

खत्री : 1,000 

जाटव : 2,500 

बेलदार : 8,000 

धोबी : 6000 

कोरी :3,000 

बाल्मीकि : 3,000 

नाथ : 5,00 

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