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चुनावी मैदान में नहीं होने के बाद भी जनता अपने विधायक को कर रही है याद, जानिए कौन है यह विधायक,

मंजूर भाई

बरेली |  यूपी का बरेली जिला राजनीति की जड़ों से जुड़ा है | बरेली का यूपी का ऐसा जिला है जिसने सूबे को पहला मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत के रूप में दिया | वर्तमान में बरेली जिले की 9 विधानसभा सीटे है | सभी सीटों पर लड़ चुके विधायक  यूपी की राजनीति में अपनी खास हैसियत रखते है | मौजूदा  विधानसभाओं में बहेड़ी विधानसभा ऐसी विधानसभा है जहां से एक से बढ़कर एक दिग्गज नेता हुए | इन्ही दिग्गजों में नाम शामिल है मरहूम विधायक मंजूर अहमद का , वह बहेड़ी विधानसभा सीट से दो बार विधायक बने , मंजूर अहमद अपनी विधानसभा में बेहद लोकप्रिय थे उनके बारे में कहा जाता है कि उनकी राजनीति अपने ही तरह की एक अलग राजनीति थी | वह अपने कार्यकाल में कभी किसी की सिफारिस के थाने नहीं गए बल्कि थाना प्रभारी खुद ही उनके दफ्तर पर आकर पूरे मामले और कार्रवाई से अवगत कराता था | उनकी एक विशेषता यह भी थी वह चुनाव लड़ते थे मगर कभी मत मतगणना स्थल पर नहीं जाते थे | जब रिजल्ट आता था तो उन्हें सबसे पहले उनके परिवार के लोग रिजल्ट को बताया करते थे या फिर उनके कार्यकर्त्ता उनके रिजल्ट को बताते थे |

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बहेड़ी की राजनीति से ताल्लुक रखने वाले जिराज अहमद बताते है कि मरहूम  मंजूर साहब एक कांग्रेसी थे वह अपने जीवन की शुरुआत में  जिला कांग्रेस कमेटी में जनरल सेक्रेटरी हुआ करते थे | 1989 में  कांग्रेस के खिलाफ माहौल बना और  जनतादल का उदय हुआ , वर्ष 1989 में मंजूर अहमद निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे और कांग्रेस  के अम्बा प्रसाद की राजनैतिक पारी को उन्होने विराम दिया। 1991 के आम चुनाव में भाजपा से हरीश चन्द्र गंगवार ने यहॉ चुनावी समीकरण बदले और बहेड़ी विधासनभाक्षेत्र में कमल ने दस्तक दी।बाबरी विध्वंश के बाद बदले समीकरणों में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर चुके मंजूर अहमद ने 1993 में चुनाव जीता। 1996 के चनुाव में हरीश चन्द्र ने फिर वापसी की और भाजपा को जीत दिलाई। 2002 के आम चुनाव हुए जिसमें समाजवादी पार्टी से मंजूर अहमद ने एक बार फिर इस सीट पर अपना कब्जा जमाया। यहॉ 2002 के अंत में विधानसभा के लिए उपचुनाव हुए और वर्तमान विधायक अताउर रहमान ने बसपा के बैनर तले चुनाव लड़ा और समाजवादी पार्टी की मुमताज जहॉ को चुनाव हराकर बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया। 

 जिराज अहमद बताते है कि दरसल पुराने समय मे  बहेड़ी  विधानसभा , 56 विधानसभा हुआ करता थी  | उस समय दोनों सरकारों के पास सीमित संसाधन हुआ करते थे | 1980 के बाद  कांग्रेस ने इस क्षेत्र में बहुत काम हुआ , 1980 -89 तक एनडी तिवारी ने बहुत काम किया | बहेड़ी  एनडी तिवारी की भी कर्मभूमि रही है | एनडी तिवारी ने यूपी  में चार बड़े कारखाने भी लगाए साथ ही  कई दर्जन यूपी में शुगर कारखाने भी लगाए | 1990 में  कारसेवा के दौरान बहुत देश में माहौल ख़राब हो गया , उस समय यूपी में मुलायम सिंह की सरकार थी जिसे कांग्रेस ने समर्थन दिया था | उसी दौरान जनतादल टूट गया | 1991 में  विधानसभा -लोकसभा चुनाव  एक साथ हुए 91 में कारसेवा हुई थी , कारसेवा को तत्कालीन मुख्यमंत्री सीएम मुलायम सिंह ने रोका था जिससे समाज का एक घटक नाराज हो गया , और मुलायम सिंह को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा |और भाजपा की सरकार बन गई थी  | 2002 का चुनाव हुआ  तो मंजूर अहमद को बहेड़ी की जनता ने अपना विधायक बनाया , उस समय केंद्र में भाजपा की सरकार थी मुलायम सिंह की पार्टी सिंगल बड़ी पार्टी की तौर पर उभरी , लेकिन उस समय के गवर्नर ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया | इस बात से नाराज होकर सपा द्वारा गवर्नर हाऊस में धरना आयोजित किया गया | धरने के दौरान मंजूर अहमद की गोली मारकर  हत्या कर दी गई | हत्या के मामले में एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया | बाद में सीबीआई जाँच भी हुई पर नतीजा नहीं निकल पाया | बाद मे मंजूर साहब के जनाजे में शामिल होने के लिए मुलायम सिंह यादव खुद बहेड़ी आये और परिवार को दुःख की घड़ी में सांत्वना दी | इसी बीच यूपी की राजनीती में बड़ा बदलाव आया  बसपा को भाजपा ने समर्थन दिया और  मायावती मुख्यमंत्री बन गई , 2002 में  ही अताउर रहमान को बसपा -भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया  , बहेड़ी में मंजूर अहमद की हत्या के चलते उपचुनाव हुआ ,2002 में मंजूर अहमद की पत्नी को टिकट दिया गया , जनता उनके साथ थी लेकिन नतीजा बसपा के खाते में गया |  वर्ष 2022 बीच में यह भी चर्चा यह भी थी सपा प्रत्याशी के रूम में मंजूर अहमद के बेटे अंजुम रशीद उम्मीदवार होंगे , लेकिन यह चर्चा भी क्षेत्र में अफवाह ही साबित रही | हालाँकि मंजूर अहमद की पत्नी एक बार नगर पालिका की चेयरमैन भी बनी थी | 

बहेड़ी विधानसभा का राजनैतिक इतिहास

बहेड़ी विधानसभा के लिए पहला निर्वाचन 1957 में हुआ था और लगातार तीन 1957 ,1962 और 67 में यह सीट इन्डियन नेशनल  कांग्रेस  की झोली में रही। 1969 के चुनाव में यहॉ क्रॉति दल ने इस सीट पर कब्जा जमाया। 1974 और 1977 के चुनाव में यहॉ फिर से कॉग्रेस ने अपना कब्जा जमाया। 1980 में अम्बा प्रसाद ने निर्दलीय चुनाव लड़कर बहेड़ी विधानसभा से प्रतिनिधित्व किया और फिर वह कॉग्रेस में शामिल हो गये। 1985 का चुनाव अम्बा प्रसाद ने कॉग्रेस के बैनर तले जीता। 1989 में मंजूर अहमद निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे और कांग्रेस  के अम्बा प्रसाद की राजनैतिक पारी को उन्होने विराम दिया। 1991 के आम चुनाव में भाजपा से हरीश चन्द्र गंगवार ने यहॉ चुनावी समीकरण बदले और बहेड़ी विधासनभाक्षेत्र में कमल ने दस्तक दी।बाबरी विध्वंश के बाद बदले समीकरणों में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर चुके मंजूर अहमद ने 1993 में चुनाव जीता। 1996 के चनुाव में हरीश चन्द्र ने फिर वापसी की और भाजपा को जीत दिलाई। 2002 के आम चुनाव हुए जिसमें समाजवादी पार्टी से मंजूर अहमद ने एक बार फिर इस सीट पर अपना कब्जा जमाया। यहॉ 2002 के अंत में विधानसभा के लिए उपचुनाव हुए और वर्तमान विधायक अताउर रहमान ने बसपा के बैनर तले चुनाव लड़ा और समाजवादी पार्टी की मुमताज जहॉ को चुनाव हराकर बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया। उपचुनाव के बाद फिर 2007 के चुनाव में भाजपा के छत्रपाल सिंह ने इस सीट को अपनी झोली में डाला। इस दौरान अताउर रहमान ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन की और 2012 का आम चुनाव साइकिल के बैनर तले लड़ा। उन्होने भाजपा के छत्रपाल सिंह को मात्र अठारह मतों से मात दी। बताते हैं कि भाजपा की जिद पर पिछले चुनाव में दो बार रिकाउन्टिंग की गयी लेकिन नतीजा नहीं बदला। भाजपा के छत्रपाल सिंह अपनी हार पचा नहीं सके, उन्होने कोर्ट की शरण ली और आज भी यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। 2017 में छत्रपाल गंगवार में भाजपा से विधायक बने और  2022 यूपी विधानसभा  चुनाव से पहले योगी सरकार में राजस्व मंत्री बने , हालाँकि यहां वर्तमान में भी विकास को पंख नहीं लग सके |

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