बरेली में अंबेडकर जयंती से पहले सियासी हलचल तेज, पोस्टर-बैनरों पर छिड़ी राजनीति

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बरेली में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती से पहले शहर की सड़कों, चौराहों और मोहल्लों में बड़े पैमाने पर पोस्टर-बैनर लगाए गए हैं। खासतौर पर समाजवादी पार्टी के झंडे, होर्डिंग और बधाई संदेशों ने शहर का दृश्य बदल दिया है। कई स्थानों पर नीले रंग की झलक और अंबेडकर की तस्वीरों के साथ सपा नेताओं की मौजूदगी साफ नजर आ रही है।

इसी बीच बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह ने सपा की सक्रियता पर सवाल उठाते हुए इसे दिखावा करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए सपा ने बाबा साहब से जुड़े मुद्दों की अनदेखी की थी और अब जयंती के बहाने राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने ‘पीडीए’ अभियान को भी महज राजनीतिक रणनीति बताया और आगामी 2027 चुनाव में सपा की हार का दावा किया।

वहीं, अंबेडकर जन्मोत्सव समारोह समिति से जुड़े राजीव कुमार सिंह का कहना है कि जयंती के मौके पर सभी दल अपने-अपने तरीके से दलित समाज को आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे आयोजन का स्वरूप राजनीतिक होता नजर आता है।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, समाजवादी पार्टी और हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय अखिलेश यादव जी श्रद्धेय बाबा साहब का हृदय से सम्मान करते हैं।

 

जहाँ तक पोस्टर-बैनर से राजनीतिकरण की बात है, बाबा साहब ने संविधान के माध्यम से सभी वर्गों के हित सुरक्षित किए, जिसके लिए पार्टी कृतज्ञ है। सपा हमेशा उनकी जयंती विधानसभा स्तर पर मनाती आई है और इस बार सेक्टर स्तर पर भी कार्यक्रम हो रहे हैं। हमारा उद्देश्य बाबा साहब के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है, इसलिए पोस्टर-बैनर लगाकर जयंती को समारोह की तरह मनाया जा रहा है।

पूर्व सपा प्रवक्ता मयंक शुक्ला ने भी इसे राजनीतिकरण मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह पहल सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है।
फिलहाल, अंबेडकर जयंती के आयोजन से पहले बरेली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और पोस्टर-बैनरों के जरिए सियासी संदेश देने की होड़ साफ दिखाई दे रही है।

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Author: newsvoxindia

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