बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान इज्जतनगर में बी.वी.एससी. एवं ए.एच. (बैच–2020) के उत्तीर्ण विद्यार्थियों का शपथ ग्रहण समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक एवं कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने की, जबकि मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के कृषि शिक्षा विभाग के सहायक महानिदेशक डॉ. अजीत सिंह यादव रहे।

मुख्य अतिथि डॉ. अजीत सिंह यादव ने कहा कि पशुपालन एवं पशु चिकित्सा क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने बताया कि पशुपालन क्षेत्र कृषि सकल मूल्य में लगभग 31 प्रतिशत और राष्ट्रीय सकल मूल्य में करीब 5.5 प्रतिशत का योगदान देता है। भारत का दुग्ध उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान होना पशु चिकित्सकों के योगदान का परिणाम है। उन्होंने नई शिक्षा नीति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परिणाम आधारित शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता और आजीवन अधिगम आज की आवश्यकता है।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि आईवीआरआई को वर्ष 2015 से बी.वी.एससी. एवं ए.एच. पाठ्यक्रम लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसे संस्थान ने सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्होंने कहा कि “डॉक्टर” शब्द सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है, इसलिए नवस्नातकों को अपने आचरण में व्यावसायिकता और नैतिकता बनाए रखनी चाहिए।

संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डॉ. एस. के. मेंदिरत्ता ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि पशु चिकित्सा एक सेवाभावी पेशा है। कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद इस बैच ने अनुकरणीय अनुशासन और समर्पण दिखाया।
स्नातक समन्वयक डॉ. रजत गर्ग ने बताया कि पाठ्यक्रम की अवधि पाँच वर्ष रही, जिसमें एक वर्ष का अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है। इस बैच के अधिकांश विद्यार्थियों को रोजगार प्राप्त हो चुका है और कई छात्रों ने आईसीएआर परीक्षाओं में शीर्ष रैंक हासिल की है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. हिमानी धांजे ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. यू. के. डे द्वारा दिया गया। इस अवसर पर संस्थान के अधिकारी, वैज्ञानिक, शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे।




