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भारत का गणतंत्र दिवस विविधता में एकता का उत्सव:मुफ्ती सलीम

बरेली : आलाहज़रत के मदरसा मंज़र-ए-इस्लाम  में 75 वां गणतंत्र दिवस बहुत अजीमुशशान अंदाज में मनाया गया। इस मौके पर दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हानी मियॉ व सज्जादानशीन हज़रत मुफ्ती अहसन मियॉ ने मुल्क में अमन व शान्ति,मकामाते मुकद्दसा की हिफाजत और मज़हब व मसलक की तरक्की के लिए खुसुसी दुआ की। मुफ्ती मोइनुद्दीन,मुफ्तीअफरोज आलम,मुफ्ती जमील,मुफ्ती अख्तर,सय्यद शाकिर,सय्यद जुल्फी, मौलाना कलीमुरहमान,कारी अब्दुल हकीम,मुफ्ती अय्यूब खान,मंजूर खान,मौलाना अबरारुल हक आदि ने यौमे जमहुरिया की सब को मुबारकबाद दी।

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मीडिया प्रभारी नासिर क़ुरैशी ने बताया कि मदरसे के प्रधानाचार्य मुफ्ती आकिल रज़वी,मदरसा शिक्षकों और मदरसा छात्रों ने तय वक्त पर तिरंगा फहराकर हिन्दुस्तानी तराना पढा,उसके बाद मदरसा मंज़र-ए-इस्लाम के छात्रों ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिस में भारत के संविधान की खुसूसियत और अहमियत पर रौशनी डाली। मास्टर कमाल,मौलाना डाक्टर एजाज अंजुम व मुफ्ती सलीम बरेलवी साहब ने आज़ादी की जंग में मदरसों की भूमिका और भारत के संविधान बनने और उसके लागू होने के इतिहास पर रौशनी डालते हुए इस संविधान के अस्ल मक़सद आपसी सौहार्द को बढावा देने और अनेकता में एकता का भाव रखने तथा नफ़रत के खात्मे पर जोर दिया।

 

तिरंगा  लहराने के बाद रज़वी हाॅल दरगाह आला हज़रत पर  गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन हुआ।जिस में गणतंत्र दिवस की खुशी में लगभग सौ से अधिक मदरसा छात्रो और मस्जिद के इमाम हजरात को आपसी सौहार्द को मजबूत करने संबंधी नव वर्ष की डारियां और मजहबी किताबें तकसीम की गईं। शान अहमद सुब्हानी ने दरगाह प्रमुख हज़रत सुब्हानी मियॉ और सज्जादानशीन हज़रत मुफ्ती अहसन मियॉ साहब की ओर से मदरसा छात्रो को गर्म जैकिटे,टोपे और मोजे तकसीम किए।

 

मुफ्ती सलीम बरेलवी ने खिताब करते हुए  में कहा कि भारत में गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है। 26 जनवरी 1950 भारतीय संविधान लागू हुआ था। यह लोकतंत्र,न्याय,स्वतंत्रता और समानता के मूल्यों का सम्मान करते हुए हम सब के लिए गौरव का दिन है। गणतंत्र दिवस एक मुखतलिफ और अनेकता वाले समाज में सांप्रदायिक सद्भाव व आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने का हम से मुतालबा करता है और हमें हमारे बुजुर्गों द्वारा किए गए प्रयासों की याद दिलाता है।हमारा मुल्क अनेक संस्कृतियों,भाषाओं, बहुत से मज़हबों और परंपराओं का एक मिश्रण है। यही इसकी खूबी है।हमारे मुल्क ने सब को एक माला मे पिरो कर रखने की दिशा में लगातार काम किया है।

 

भारतीय संविधान,राष्ट्र का मार्गदर्शन दस्तावेज,सांप्रदायिक सद्भाव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है, प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के धर्म को मानने,अभ्यास करने और प्रचार करने की अनुमति देता है। इसके अतिरिक्त आरक्षण जैसे सकारात्मक कार्रवाई उपायों को ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों के उत्थान,समानता और सामाजिक न्याय की भावना को बढ़ावा देने के लिए लागू किया गया है। धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान के बुनियादी सिद्धांतों में से एक है। हुकुमत का फर्ज है कि वह धर्म और राज्य को जोड़ने और सभी समुदायों के बीच दूरियों को पाटने की कोशिश करें।

 

विभिन्न धर्मों के लोगों को रचनात्मक बातचीत में शामिल होने, एक-दूसरे की मान्यताओं को समझने और साझा सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करे,ऐसे कानून बनाने और लागू करने के प्रयास करे जो नागरिकों को धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव से बचाते हों। भारतीय संविधान की खासियत भी यही है कि यह मुल्क के हर शहरी को मजहब,तहजीब,जुबान हर तरह की आजादी देता है इसलिए हुकुमत कोई ऐसा कानून ना बनाए जिस से किसी समुदाय विशेष को अपने साथ भेदभाव का एहसास हो और उसका हुकुमत से भरोसा उठ जाए।

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