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बरेली। दरगाह आलाहजरत पर मनाया गया उर्स-ए-नूरी, उलेमाओं ने वोटिंग के साथ दीन दुनिया पर दी अपनी राय,

 

 

बरेली।दरगाह आला हज़रत पर आज मुफ्ती-ए-आज़म का 43 वॉ एक रोज़ा उर्स-ए-नूरी दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान(सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती व सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी(अहसन मियां) सदारत में मनाया गया। उर्स में शिरकत के लिए देश भर से उलेमा व अकीदतमंद दरगाह पहुँचे। दिन भर अकीदतमंदों का दरगाह पर गुलपोशी का सिलसिला चला। देश के मशहूर उलेमा की तक़रीर हुई।

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निज़ामत(संचालन) कारी यूसुफ रज़ा संभली ने किया। साथ ही कर्बला के 72 शहीदों को खिराज़ पेश कर हुसैनी व नूरी लंगर आम रहा। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि देर रात एक बजकर चालीस मिनट पर मुफ़्ती आज़म हिन्द के कुल शरीफ की रस्म सय्यद आसिफ मियां,मुफ़्ती आकिल रज़वी,मुफ़्ती अय्यूब नूरी,मुफ़्ती सय्यद कफील हाशमी,मुफ़्ती अफ़रोज़ आलम,मुफ़्ती जमील,मुफ़्ती अनवर अली आदि की मौजूदगी में अदा की गई। सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी ने मिल्लत व मुल्क में अमन और खुशहाली की ख़ुसूसी दुआ की।

 

दरगाह आलाहजरत

उर्स का आगाज़ बाद नमाज़ फ़ज़्र कुरानख्वानी से हुआ। नातख्वा हाजी गुलाम सुब्हानी,आसिम नूरी व महशर बरेलवी ने आला हज़रत व मुफ़्ती आज़म हिन्द द्वारा लिखे कलाम पेश किए।

 

*मुख्य कार्यक्रम का आगाज़ कारी रिज़वान रज़ा ने तिलावत-ए-क़ुरान से दरगाह प्रमुख हज़रत सुब्हानी मियां की मौजूदगी में बाद नामज़ ईशा किया। इसके बाद देश भर से आये उलेमा ने मौजूदा दौर में मुसलमानों में सामाजिक,आर्थिक,धार्मिक,राजनीतिक क्षेत्र में बेदारी लाने पर चर्चा की। जिसमे मुख्य रूप से आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मुस्लिम विशेषकर महिलाओं में वोटिंग के अधिकार को समझते हुए अपने वोट के इस्तेमाल की भावना पैदा करने। मुस्लिम महिलायें व बच्चियों को बहला-फुसलाकर अपने मज़हब व समाज से बगावत को देखते हुए मुल्क भर में उलेमा द्वारा मुस्लिम महिला सशक्तिकरण चलाकर उनकी गैरो से हिफाज़त करने पर जोर दिया गया।

 

अपने खिताब में मुफ़्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि मुफ़्ती-ए-आज़म ने पूरी ज़िंदगी में मज़हब की खिदमत के साथ समाज सुधार के काम अंजाम दिए। आज हमारे मज़हब की बहन-बेटियों का दीन,इज़्ज़त और जान खतरे में है। ऐसे में इनकी वक़्त-वक़्त पर माँ-बाप द्वारा कॉउंसलिंग करने और मज़हब व समाज से जुड़े रहने के लिए तालीम(शिक्षा) देना बेहद ज़रूरी है।* शहर काजी बहेड़ी मौलाना मुख्तार बहेडवी ने अपनी तक़रीर में कहा कि मुस्लिम बच्चियों में मज़हबी तालीम की कमी की बुनियाद पर वो गैरों के बहकावे में आकर अपना मज़हब और घर-खानदान सब कुछ कुर्बान कर दे रही है। ऐसे में उलेमा के साथ-साथ माँ-बाप और भाइयों की ज़िम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वो कहा जा रही है और किसके उनका मिलना जुलना है।

 

मुरादाबाद के अल्लामा कारी सखावत हुसैन रज़वी ने भी मुस्लिमो में शिक्षा व महिलाओं में सशक्तिकरण पर ज़ोर दिया। कारी अब्दुर्रहमान क़ादरी ने मुफ़्ती-ए-आज़म हिन्द को खिराज़ पेश करते हुए कहा कि मुफ़्ती-ए-आज़म हिन्द हमेशा हक़्क़नियत पर कायम रहते हुए शरीयत में मुदाखलत बर्दाश्त नही की। आज हमें उनसे सीख लेकर मज़हब व शरीयत की भी हिफ़ाज़त करनी है और अपनी बहन-बेटियों की भी ताकि वो गलत लोगों के चुंगल से महफूज़ रहे।

अल्लामा मुख़्तार बहेडवी ने कहा कि मुस्लिम लड़िकयों के बहकने की एक वजह शादियों में फुजूलखर्ची व दहेज़ जैसी सामाजिक बुराई भी है। जिससे शादियां मुश्किल हो रही है जबकि अल्लाह के रसूल ने निक़ाह को आसान करने का हुक्म दिया।

 

उर्स की व्यवस्था टीटीएस के परवेज़ नूरी,शाहिद नूरी, हाजी जावेद खान,अजमल नूरी,नासिर कुरैशी,औररंगज़ेब नूरी,ताहिर अल्वी,मंज़ूर रज़ा,शान रज़ा,आसिफ रज़ा,आलेनबी,मुजाहिद बेग,ग़ज़ाली रज़ा,हाजी अब्बास नूरी,नईम नूरी,सय्यद माजिद,सय्यद एजाज़,सुहैल रज़ा,अरवाज़ रज़ा, अब्दुल माजिद रज़ा,मोहसिन रज़ा,गौहर खान,साजिद रज़ा,काशिफ सुब्हानी,तारिक सईद,आरिफ नूरी,सबलू अल्वी,शारिक बरकाती,साकिब रज़ा,इशरत नूरी,इरशाद रज़वी,यूनुस गद्दी,ख़लील क़ादरी,शाद रज़ा,अश्मीर रज़ा आदि ने संभाली।

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