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आबिद के आरोप के बाद सपाई आये बैकफुट पर , नीरज मौर्य ने आबिद के आरोपों को नकारा 

बरेली। आंवला सीट से बसपा के चुनाव चिन्ह पर लड़ रहे चुनाव सपा -कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी  नीरज मौर्य एक दिन पहले  गंभीर आरोप लगाते हुए बरेली सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसके बाद से सपाई नेता बैकफुट पर आ गए और आनन फानन में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मामले पर सफाई दी। नीरज मौर्य अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेहद थके हुए और परेशान दिखाई दे रहे थे। सपा उम्मीदवार नीरज मौर्य ने प्रे कॉन्फ्रेंस में आबिद  आरोपों को गलत  बताया और कहा कि अगर उनके ऊपर आबिद के आरोप सही पाए जाते ही तो वह राजनीति से सन्यास ले लेंगे।
नीरज मौर्य ने यह भी कहा कि आंवला में सपा की लहर है जिससे विपक्षी परेशान है। उन्होंने आबिद अली को निशाना साधते हुए आबिद अली को भाजपा की बी टीम बताया।  वही सपा के वरिष्ठ नेता वीरपाल यादव ने कहा कि आबिद सपा के वोटरों की वजह से चेयरमैन बने थे उन्हें जानता कौन है। वह कोई भी चुनाव साईकिल के चुनाव के बैगर लड़कर देख ले उन्हें सच पता चल जायेगा। नीरज मौर्य  कोतवाली में  मुकदमे पर बरेली पुलिस को निशाने पर लेते हुए कहा कि पुलिस ने जांच किये बिना ही दवाब में मुकदमा दर्ज कर लिया।
कलेक्ट्रेट सिम्बल लेने पहुंचे आबिद ने आरोप लगाया कि नीरज मौर्य के कहने पर उनके खिलाफ साजिश हुई थी जिसमें सत्यवीर  सहित उनके जानने वाले लोग शामिल थे।  जिस कारण उनका नामांकन पर्चा खारिज कर दिया गया था। आरोपियों ने बसपा का फर्जी सिंबल लेकर नामांकन कराया था और राष्ट्रीय अध्यक्षा मायावती के फर्जी साइन करके अपना नामांकन करके उनके दोनों पर्चे खारिज करा दिए थे।
बाद में  बसपा प्रमुख ने ऑनलाइन आकर अधिकारी के सामने बताया था कि आबिद ही उनके असली कैंडिडेट है। इसके बाद  ही उनके निर्देश पर नीरज मौर्य और उनके समर्थक सत्यवीर पर मुकदमा दर्ज कराया गया था।
आबिद के आँख में आंसूओं  ने सबकों को झकझोरा 
बरेली जिले में दो दिन पहले जब निर्वाचन अधिकारियों ने नामांकन पर्चे में   बताकर शहर सीट से लड़ रहे बसपा उम्मीदवार  मास्टर छोटे लाल का नामांकन पर्चा ख़ारिज कर दिया था। साथ ही आंवला से बसपा के उम्मीदवार आबिद  का भी पर्चा विचाराधीन केटेगरी में रख दिया था। इसके बाद शहर की राजनीति में भूचाल आ गया था। तब लोगों ने तरह तरह के कयास अपने हिसाब से लगाने शुरू कर दिए थे। बसपा उम्मीदवार अपना लगभग नामांकन पर्चे को खारिज मानते हुए रोने लगे थे। जिसके बाद से उनके प्रति लोगों में सहानुभूति भी दिखने लगी थी। हालांकि देरशाम को प्रशासन ने आबिद अली के  नामांकन  सही मान लिया गया था।

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