अनुज सक्सेना
बरेली। शहर की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक सौहार्द की बात हो तो जनार्दन आचार्य का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। पिछले करीब 50 वर्षों से वे बरेली में पुलिस, प्रशासन और आम जनता के बीच भरोसे की मजबूत कड़ी बने हुए हैं। उम्र भले ही अब उनके कदमों को धीमा कर रही हो, लेकिन समाजसेवा के प्रति उनका जज़्बा आज भी युवाओं जैसा है।

जनार्दन आचार्य ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा जनसेवा को समर्पित किया है। आकाशवाणी सहित कई मीडिया संस्थानों के साथ जुड़कर उन्होंने जनहित के मुद्दों को आवाज़ दी। उनकी निष्पक्ष सोच और संतुलित व्यक्तित्व के कारण प्रशासन भी उन पर भरोसा करता है और आम लोग भी उन्हें अपना मानते हैं।

बरेली में पूर्व में हुए सांप्रदायिक तनाव और दंगों के दौरान उन्होंने शांति स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। संवेदनशील हालात में उन्होंने दोनों समुदायों के बीच संवाद कायम कराया और हालात सामान्य बनाने में सक्रिय सहयोग दिया। कई बार उनकी पहल से बड़े विवाद टल गए और माहौल शांतिपूर्ण बना रहा।

उनकी वर्षों की समर्पित सेवा और समाज में सक्रिय भूमिका को देखते हुए एसपी प्रशासन ने उन्हें विशेष सम्मान प्रदान करते हुए उनकी स्कूटी पर हूटर लगाने की अनुमति दी। यह सम्मान केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि उनके योगदान के प्रति प्रशासन की सराहना का प्रतीक है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे तुरंत मौके पर पहुंचकर सहयोग कर सकें।

आलाहजरत दरगाह के पास निवास करने वाले जनार्दन आचार्य आज भी लोगों की समस्याएं सुनते हैं, संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाते हैं और समाधान के लिए प्रयासरत रहते हैं।शहरवासी उन्हें केवल एक समाजसेवी नहीं, बल्कि इंसानियत का सच्चा सिपाही मानते हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सेवा और समर्पण की कोई उम्र नहीं होती ,बस नीयत सच्ची होनी चाहिए।



