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स्वास्थ्य

भागती दौड़ती ज़िंदगी और तनावपूर्ण जीवन ही है कैंसर का कारण

Rotary 1

बरेली। इंसान आज अपनी दिनचर्या और जीवनशैली के कारण ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है युवाओं में आजकल मधुमेह, रक्तचाप, मोटापा, बांझपन, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां पनप रही है जिसका मुख्य कारण अनियमित और अनियंत्रित खानपान है, क्योंकि आज हमारी पारंपरिक जीवन शैली बदल गयी है आज के वक़्त की एक्टिव जीवनशैली में जिसमें बाहर खाना गलत वक़्त पर खाना धूम्रपान, शराब, देर रात पार्टी करना रहता है। इन्हीं सब वजहों से युवा वर्ग का शरीर बीमारियों का अड्डा बन जाता है, ये विचार आज रोटरी भवन में हुए एक जागरूकता कार्यक्रम में पारस हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ रंगा राव ने व्यक्त किये, आज का कार्यक्रम रोटरी क्लब ऑफ बरेली सेंट्रल और रोटरी क्लब ऑफ़ गुड़गांव(कुतब एन्क्लेव) द्वारा आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे आई जी बरेली रमित शर्मा।डॉ रंगा राव ने बताया कि भारत मे लगभग 23 प्रतिशत कैंसर रोगी हर साल होते हैं हमारे यहां 3 प्रकार के कैंसर सबसे ज़्यादा होते हैं पहला ब्रेस्ट या स्तन कैंसर जो हर साल लगभग 2 लाख महिलाओं में होता है। और उनमें से 40 प्रतिशत की मौत हो जाती है।दूसरा होता है बच्चेदानी का कैंसर ये भी लगभग इतनी ही महिलाओं में हर साल हो जाता है।तीसरा मुँह का कैंसर जो अधिकतर पान मसाला चबाने से होता है, उसी प्रकार सिगरेट के धुएं से फ़ेफ़डों का कैंसर होता है महिलाओं में तो ये अधिक घातक होता है। कैंसर एक आतंकवादी की तरह हमारे शरीर मे घुस कर उसे बर्बाद कर देता है।सबसे बड़ी बात तो ये है कि कैंसर का पता तीसरी या चौथी स्टेज में आ कर लगता है तब ईलाज़ मुश्किल हो जाता है। क्योंकि शुरुआत में कैंसर के कोई लक्षण इंसान में नहीं दिखते 2 स्टेज के बाद ही दिखते हैं।डॉ पीयूष ने बताया कि महिलाओं को अपनी मैमोग्राफी जांच समय समय पर कराते रहना चाहिए जिससे स्तन कैंसर का पता समय से लग जाये और ईलाज़ हो सके, उसी प्रकार सिगरेट के धुएं से पास बैठे लोगों को भी ख़तरा रहता है उसको भी कम करना चाहिए, अधिक तंबाकू सेवन से भी बचना चाहिये।एल्कोहल का प्रयोग भी कम करना चाहिए। क्योंकि इसका ईलाज़ मुश्किल के साथ साथ खर्चीला भी है।रोटरी क्लब गुड़गांव की अध्यक्ष मीता घोष ने कहा कि सभी रोटेरियन यदि ये मकसद बना लें कि हमें अपने सभी जानने वालों का नियमित चेकअप करवाना है ताकि सबकी ये आदत बन जाये और बीमारियों का आटा समय रहते लग जाये और उन्हें फ़ायदा हो, मेरे घर मे मेरे पिताजी का निधन भी लिवर कैंसर से हुआ था इसलिए मैं इसकी तकलीफ़ समझती हूं और मैं नहीं चाहती कि कोई इससे गुज़रे।कार्यक्रम के अंत मे वोट ऑफ़ थैंक्स रोटेरियन निखिल अग्रवाल द्वारा दिया गया उन्होंने कहा कि ऐसी परिचर्चाएँ होती रहनी चाहिए ताकि जागरूकता बनी रहे।कार्यक्रम में शामिल लोगों मे अतुल कपूर, विशाल मेहरोत्रा, आशु अग्रवाल, भरत केवलानी, राजीव खुराना, पंकज मिश्रा, अजय राज शर्मा, अमित कंचन, आलोक प्रकाश, सारिका सक्सेना, शैली गोयल, मोनिका गर्ग, रुचि मलिक, सोनल शर्मा आदि मौजूद रहे।मंचासीन अथितियों में रोटेरियन आलोक प्रकाश, रोटेरियन मीता घोष, रोटेरियन राजीव गोयल, डॉ रंगा राव, डॉ अंशु गर्ग, डॉ सुजाये मुखर्जी थे।

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