बरेली।उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाल वाटिका की नींव रखने वाले एजुकेटर्स का सब्र अब टूटने लगा है। पिछले सात महीनों से मानदेय न मिलने के कारण बरेली के दमखोदा ब्लॉक के एजुकेटर्स भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। मजबूर होकर शिक्षकों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी की चौखट पर दस्तक दी और लिखित शिकायत सौंपकर अपना दर्द बयां किया।
एजुकेटर्स ने शिकायती पत्र में बताया कि उनकी नियुक्ति जून 2025 में आउटसोर्सिंग के माध्यम से की गई थी। नियुक्ति के समय नियमित मानदेय और समय पर भुगतान के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन हकीकत यह है कि बीते सात महीनों से उन्हें एक भी रुपया नहीं मिला। खाली जेब और बढ़ती महंगाई के बीच उनके घरों का चूल्हा बुझने की नौबत आ गई है।
शिक्षकों का कहना है कि वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से सुबह समय पर स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। विभाग और विद्यालय के सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है, फिर भी मानदेय न मिलना ‘नैसर्गिक न्याय’ के सिद्धांतों के खिलाफ है। उनका सवाल है कि आखिर किस निष्ठा की सजा उन्हें दी जा रही है।एजुकेटर्स ने चेतावनी दी कि विभागीय उदासीनता के चलते सैकड़ों शिक्षकों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। आर्थिक तंगी के कारण परिवार का भरण-पोषण करना अब उनके लिए असंभव होता जा रहा है।
डीएम के हस्तक्षेप से शासन में हलचल
मामला जिलाधिकारी बरेली के संज्ञान में आते ही शासन स्तर पर हलचल मच गई। राज्य परियोजना निदेशालय, लखनऊ ने आनन-फानन में बजट जारी करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। ताजा सरकारी आदेश के अनुसार बरेली के 170 एजुकेटर्स के लिए 146.30 लाख रुपये की लिमिट जारी कर दी गई है, जिससे जल्द ही मानदेय मिलने की उम्मीद जगी है।
“कागज नहीं, खाते में पैसा चाहिए”
हालांकि एजुकेटर्स का कहना है कि सिर्फ बजट जारी होना कागजी कार्रवाई है। असली राहत तब मिलेगी जब पैसा सीधे उनके खातों में पहुंचेगा। उन्होंने मांग की है कि भविष्य में उनका मानदेय हर महीने समय पर सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें बार-बार अधिकारियों की चौखट पर गुहार न लगानी पड़े।



