बरेली।बहेड़ी के गांव सिमरा भोगपुर के रहने वाले सुरेश बाबू ने साबित कर दिया कि मेहनत और हिम्मत से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। मूक-बधिर बच्चों को पढ़ाते हुए उन्होंने पीसीएस परीक्षा की तैयारी की और तीसरे प्रयास में नायब तहसीलदार बन गए।
सुरेश बाबू का परिवार साधारण है। उनके पिता सेवाराम खेती के साथ-साथ तहसील में पुराने कागजों की मरम्मत का काम करते हैं। आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं रही, लेकिन उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी। छोटे भाई नरेश बाबू आज भी गांव में खेती करते हैं।जीवन में कई मुश्किलें आईं। बचपन में मां का निधन हो गया और कोरोना काल में बड़े भाई को भी खो दिया। इन दुखों के बावजूद सुरेश बाबू ने हिम्मत नहीं हारी और अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा।
साल 2011 में उन्हें बदायूं के एक स्कूल में मूक-बधिर बच्चों को पढ़ाने की नौकरी मिली। इसी दौरान उन्होंने पीसीएस की तैयारी शुरू की। नौकरी के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत की। बरेली जाकर कोचिंग करते थे और रोजाना सफर के दौरान भी पढ़ाई जारी रखते थे।
दो बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरी बार में सफलता हासिल कर ली।सुरेश बाबू का कहना है कि अगर इंसान मेहनत करता रहे और हार न माने, तो एक दिन सफलता जरूर मिलती है। उनकी सफलता से इलाके के युवाओं को बड़ी प्रेरणा मिली है।



