महाशिवरात्रि पर शिवमय हुई नाथ नगरी, त्रिवटीनाथ धाम में उमड़ी आस्था की भीड़

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अनुज सक्सेना

बरेली। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर नाथ नगरी बरेली पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूबी नजर आई। तड़के सुबह से ही शहर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दी । “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक का क्रम सुबह से जारी है।इस अवसर पर आस्था का प्रमुख केंद्र त्रिवटीनाथ महादेव मंदिर बना हुआ है, जहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे है। लगभग छह शताब्दी पुराना यह मंदिर ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के कारण विशेष महत्व रखता है।

पौराणिक मान्यता और इतिहास
लोक मान्यता के अनुसार प्राचीन समय में यह क्षेत्र घने वन से आच्छादित था। कहा जाता है कि तीन वट वृक्षों के मध्य एक शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसके बाद यहां मंदिर की स्थापना हुई और स्थान का नाम त्रिवटीनाथ पड़ा। विक्रम संवत 1474 से इसे सिद्धपीठ के रूप में प्रतिष्ठित माना जाता है। यह भी विश्वास किया जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां पूजा-अर्चना की थी।

 

विशेष सजावट और आयोजन
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और फूलों से सजाया गया। विशेष रुद्राभिषेक और महाआरती का आयोजन किया गया। शिवालय के अतिरिक्त रामालय, नवग्रह मंदिर, नंदी वन और यज्ञशाला में भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई।

 


सुरक्षा और व्यवस्थाएं
भीड़ को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए। मंदिर परिसर और आसपास पुलिस बल तैनात है, बैरिकेडिंग की गई और स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाई गई। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक परिवर्तन भी लागू किए गए है।

 

नाथ नगरी के सातों नाथ मंदिरों में गूंज रहा ‘हर-हर महादेव

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर नाथ नगरी बरेली के सभी प्राचीन नाथ मंदिरों में भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। शहर की चारों दिशाओं में स्थापित भगवान शिव के इन ऐतिहासिक मंदिरों से सैकड़ों वर्षों की आस्था जुड़ी है। सावन माह में कांवड़िये हरिद्वार और कछला से गंगाजल लाकर इन शिवालयों में अर्पित करते हैं, जबकि महाशिवरात्रि पर विशेष पूजन-अर्चन, रुद्राभिषेक और भंडारों का आयोजन भी होता है।

1. बनखंडी नाथ मंदिर
पुराने शहर में स्थित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि पांचाल राज्य की महारानी द्रौपदी ने पूर्व दिशा में गुरु के आदेश पर शिवलिंग स्थापित कर कठोर तप किया था। श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

 

2. मढ़ीनाथ मंदिर
शहर की पश्चिम दिशा में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि एक तपस्वी यहां कुआं खोद रहे थे, तभी शिवलिंग प्रकट हुआ, जिस पर मढ़ीधारी सर्प लिपटा था। इसके बाद यहां मंदिर की स्थापना हुई और यह स्थान मढ़ीनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

3. तपेश्वरनाथ मंदिर
दक्षिण दिशा में स्थित यह देवालय ऋषियों की तपोस्थली माना जाता है। कठोर तप और साधना के कारण इसका नाम तपेश्वरनाथ पड़ा। महाशिवरात्रि पर यहां विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

4. धोपेश्वरनाथ मंदिर
अग्निकोण में स्थापित इस मंदिर को धूम ऋषि द्वारा सिद्ध किया गया माना जाता है। समय के साथ इसका नाम धूमेश्वर से धोपेश्वरनाथ हो गया। इस मंदिर के प्रति भी भक्तों में विशेष श्रद्धा है।

5. अलखनाथ मंदिर
किला थाना क्षेत्र के पास स्थित इस मंदिर का संबंध आनंद अखाड़ा के अलखिया बाबा से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने यहां कठोर तप कर अलख जगाई थी, जिसके बाद यह स्थान अलखनाथ मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

6. त्रिवटीनाथ महादेव मंदिर
उत्तर दिशा में स्थित यह प्राचीन सिद्धपीठ तीन वट वृक्षों के मध्य प्रकट हुए शिवलिंग के कारण त्रिवटीनाथ कहलाया। विक्रम संवत 1474 से प्रतिष्ठित यह धाम महाशिवरात्रि पर विशेष आस्था का केंद्र बन जाता है।

 

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Author: newsvoxindia

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