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ठेका प्रथा की मार झेल रहे संविदा कर्मी, हड़ताल बनी पार्क महकमे के लिए मुसीबत,

स्वरूप पूरी ,संवाददाता ब्यूरो चीफ उत्तराखंड

 

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देहरादून- राजाजी टाइगर रिजर्व में आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से तैनात किए गए संविदा कर्मी अब एक बार फिर भुखमरी की कगार पर है । आउटसोर्स कंपनी द्वारा पिछले कई माह से वेतन न दिए जाने के कारण यह कर्मचारी अब एक बार फिर हड़ताल पर हैं । राजाजी टाइगर की सभी रेंजो में संविदा कर्मी पिछले 3 दिनों से कार्य बहिष्कार कर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। पिछले वर्ष भी यह कर्मचारी हड़ताल पर गए थे तब उस दौरान आउटसोर्स कंपनी द्वारा उनका वेतन जारी कर दिया गया था। जिसके बाद हड़ताल समाप्त हो गई थी ,मगर उस दौरान कई कर्मचारियों के चेक भी बाउंस हुए थे । इतना बड़ा वाक्या घट जाने के बावजूद भी राजाजी टाइगर प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आउटसोर्स कंपनी के खिलाफ मुकदमे के आदेश के बावजूद भी मामला रफा-दफा कर दिया गया।

रोजगार की मार झेल रहे संविदा कर्मियों के सामने कार्य करने की मजबूरी थी धीरे-धीरे उन्होंने अपना कार्य शुरू तो कर दिया था मगर अब एक बार फिर 8 माह बीत जाने के बावजूद भी उनके हाथ खाली है। वेतन न मिलने से इन संविदा कर्मियों के परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं कई परिवार ऐसे भी हैं जिनके पास खाने को कुछ नहीं तो कुछ ऐसे भी हैं जो वेतन की आस में उधारी का जीवन जी रहे हैं । मगर 24 घंटे हाड़ तोड़ मेहनत करने वाले इन संविदा कर्मियों की सुध लेने वाला कोई नहीं।

हालांकि पार्क महकमे के उच्च अधिकारियों ने कल देहरादून में इन संविदा कर्मियों से वार्ता कर जल्दी उनका वेतन रिलीज किए जाने का आश्वासन दिया महकमे के अधिकारियों द्वारा लिखित आश्वासन की मांग की गई कर्मचारियों का कहना है कि जब तक पार्क महकमा उनका वेतन व उपनल में समायोजन की मांग पूरी नही करता तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहे।

 

 

दोहरे मापदंड को लेकर संविदा कर्मियों में है नाराजगी

पार्क में कार्यरत संविदा कर्मि पिछले वर्ष से ही उपनल में समायोजित करने की मांग कर रहे हैं मगर उसके बावजूद भी उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई वही पिछले वर्ष पार्क महकमें द्वारा विभिन्न रेंजो में तैनात ड्राइवर, ऑपरेटर को उपनल में समायोजित कर दिया गया था वहीं कुछ कर्मचारी जो सैनिक परिवारों से ताल्लुक रखते थे उन्हें भी उपनल के माध्यम से रख दिया गया। इसको लेकर कर्मचारियों में आक्रोश है उनका कहना है कि जो ड्राइवर का ऑपरेटर उपनल में समायोजित किए गए हैं उनमें अधिकतर सैनिक परिवारों से ताल्लुक नहीं रखते ऐसे में उन्हें किस आधार पर उपनल के माध्यम से समायोजित किया गया अगर उन्हें समायोजित किया जा सकता है तो हमें क्यों नहीं।

 

 

“सरकार को ठेकेदारी प्रथा को खत्म कर देना चाहिए, इसका लाभ केवल ठेकेदार को होता है, सरकार द्वारा ठेकेदार को प्रति कर्मचारी साढ़े बारह हजार से तेरह हजार रुपये का भुकतान किया जाता है और ठेकेदार द्वारा हमें आठ हजार दो सौ रुपये का भुकतान दिया जाता है जिसका सीधा फायदा ठेकेदार को होता है, पिछले 7 माह से हमें किसी भी तरह का भुकतान नहीं मिला है।”

समीर, आउटसोर्स कर्मचारी राजाजी टाइगर रिजर्व।

“सात महीनों से वेतन नहीं मिला है जिसके चलते भुखमरी के हालत हो गए है, घर का खर्च चलाने को लोगो से उधार लिया हुआ है।”

शराफत अली, आउटसोर्स कर्मचारी राजाजी टइगर रिजर्व।

”आउटसोर्स कर्मियों के हड़ताल पर जाने से सभी काम प्रभावित हो रहे है, उच्च अधिकारियो द्वारा जल्द ही इनकी समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। “

अनिल पंन्यूली, रेंज अधिकारी चीला रेंज राजाजी।

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