बरेली।छोटे लोहिया के नाम से मशहूर श्रद्धेय जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि के अवसर पर समाजवादी पार्टी महानगर कार्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महानगर अध्यक्ष शमीम खाँ सुल्तानी ने कहा कि जनेश्वर मिश्र देश के उन गिने-चुने नेताओं में थे जो केंद्र सरकार में सात बार मंत्री रहे, लेकिन उनके पास न कोई बंगला था और न ही कोई सरकारी गाड़ी। यह उनकी सादगी और जमीन से जुड़े नेतृत्व का प्रतीक था।
उन्होंने कहा कि जनेश्वर मिश्र एक खांटी समाजवादी नेता थे, जिनका सम्मान हर दल और विचारधारा में किया जाता था। उनके व्यक्तित्व में समाजवादी विचारधारा की स्पष्ट छाप दिखाई देती थी। बलिया के मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे जनेश्वर मिश्र की कर्मभूमि इलाहाबाद रही। वे डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों से प्रेरित होकर राजनीति में आगे बढ़े और किसानों, नौजवानों तथा वंचित वर्गों की मुखर आवाज बने।
शमीम खाँ सुल्तानी ने कहा कि जनेश्वर मिश्र का पूरा जीवन “सादा जीवन–उच्च विचार” की मिसाल रहा। संसद में उनके भाषणों को सत्ता और विपक्ष समान रूप से ध्यान से सुनता था। उन्होंने नेताजी मुलायम सिंह यादव के समक्ष अखिलेश यादव को राजनीति में आगे लाने का प्रस्ताव रखा और उन्हें राजनीतिक प्रशिक्षण भी दिया।
पूर्व शहर विधानसभा प्रत्याशी राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए अखिलेश यादव ने जनेश्वर मिश्र के नाम पर कई जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं और लखनऊ में एशिया का सबसे बड़ा जनेश्वर मिश्र पार्क बनवाया।इस अवसर पर सपाइयों ने जनेश्वर मिश्र के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



